संकट मोचन संगीत समारोह की चौथी निशा के दूसरे चरण में नीलाद्री कुमार की मल्हार धुन ने बादलों को भी रिझा दिया और वह मंदिर प्रांगण में झमाझम बरस उठे।
नीलाद्री के सितार और बरसात की बूंदों की लयकारी देखकर दर्शक भी अभिभूत हो गए। नीलाद्री कुमार ने कार्यक्रम का आरंभ अपने पिता पं. कार्तिक कुमार द्वारा ढाई दशक पूर्व तुलसी घाट पर बनाए गए नए राग तुलसी कौंस से किया।
इस राग में मालकौंस और चंद्रकौंस दोनों का ही समावेश देखने को मिला। उनके साथ तबले पर पर विजय घाटे ने बेहतरीन संगत की। नीलाद्री जब सितार वादन कर रहे थे इसी दौरान तेज आंधी और बारिश ने भी हलचल मचा दी।
अचानक हुई बरसात के कारण अफरातफरी मची लेकिन नीलाद्री कुमार पूरी तन्मयता से सितार की तारों को छेड़ते रहे। सभी दर्शक पानी से बचने के लिए छत के नीचे आ गए और मंच के सामने परिसर पूरी तरह खाली हो गया मगर कार्यक्रम बाधित नहीं हुआ।