भक्तों ने मां कात्यायनी के दर्शन कर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कामना की। सिंधिया घाट स्थित मां कात्यायनी के दर्शन पूजन केलिए सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई। भोर में मंगला आरती के बाद माता का विधि-विधान से भव्य शृंगार किया गया। मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया। इसके बाद मंदिर आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। भक्तों ने माता को माला-फूल, नारियल और चुनरी का प्रसाद अर्पित किया।
माता का व्रत और उनकी पूजा करने से कुंवारी कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है। मां के इस रूप का पूजन-अर्चन करने से भक्तों के पाप का नाश होता है। साथ ही मां आत्मज्ञान प्रदान करती हैं। काशी के अलावा वृंदावन में भी माता अधिष्ठात्री देवी हैं। माना जाता है कि भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने कात्यायनी व्रत रखा था। इसी तरह अन्य देवी मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ लगी रही।
मां काली की महाआरती कल
शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर भोजूबीर पंचक्रोशी मार्ग पर स्थित मां दक्षिणेश्वरी काली का महानिशा पूजन एवं कालरात्रि दर्शन 12 अक्तूबर को शाम चार बजे से होंगे। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मास्क लगाकर भक्तों को दर्शन कराया जाएगा। यह जानकारी व्यवस्थापक राजेश गिरी ने दी।