इससे पहले बनारस में घाट पर आज तक कभी किसी तरह का शुल्क नगर निगम या जिला प्रशासन की तरफ से नहीं लगाया गया है। हालांकि दो साल पहले घाटों पर पंडे, पुजारी, पुरोहितों और आयोजनों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव नगर निगम ने दिया था।
मगर भारी विरोध के चलते उसे यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया था। उधर, नमो घाट पर शुल्क लगाने के मामले में स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के तर्क पर भी विरोध शुरू हो गया है। स्मार्ट सिटी की ओर कहा गया है कि शहर के बिल्कुल किनारे पर स्थित नमो घाट पर आने वाली भीड़ में बहुत से असामाजिक तत्व भी आते हैं, जो वहां पर उपद्रव करते हैं। जहां पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इसलिए चार घंटों के लिए महज 10 रुपये का शुल्क लगाया गया है।
राजघाट के मालवीय पुल के पास 35.83 करोड़ की लागत से नमो घाट (खिड़किया घाट) का फेज-1 तैयार किया गया है। सात जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस घाट का लोकार्पण किया जाना था, मगर अंतिम समय में इस परियोजना को लोकार्पण सूची से हटाया गया था। इसकी खूबसूरती ऐसा रिझा रही है कि हर दिन पांच से सात हजार सैलानी घाट पर पहुंच रहे हैं।
नमो घाट पर शुल्क लगाने के निर्णय को फिलहाल रोक दिया गया है। उच्चाधिकारियों से वार्ता कर आगे का निर्णय किया जाएगा। - प्रणय सिंह, नगर आयुक्त