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UP: चार लोगों की हत्या...दोषी को सजा-ए-मौत, 13 साल पहले लाठी व रॉड से पीटकर ली थी जान; जानें पूरा मामला

Wed, 25 Mar 2026 07:33 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में चोलापुर थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में हत्या के इस मामले ने सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मामला दर्ज करने के साथ ही शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। 
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सजा-ए-मौत के बाद आरोपी को लेकर जाती पुलिस। - फोटो : संवाद
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Varanasi Crime: 13 साल पुराने, चार लोगों की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने दोषी रविंद्र उर्फ राजू पटेल को बुधवार को मृत्युदंड फांसी की सजा सुनाई है। चोलापुर थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की लाठी और रॉड से वार कर हत्या कर दी गई थी। 

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इस मामले में कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि दोषी को तबतक फंदे से लटकाया जाए जबतक उसकी मौत ना हो जाए। अदालत में वादी मुकदमा समेत 25 लोगों का बयान दर्ज हुआ था। साथ ही पुलिस ने घटना स्थल पर मिले साक्ष्य खून से सने कपड़े, जुते समेत अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किया था। 

पुलिस ने की कार्रवाई

इस मामले मृतक मोहनलाल जायसवाल के भाई अशोक कुमार जायसवाल ने 29 अक्तूबर 2013 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। चंदापुर गांव में 29 अक्टूबर 2013 की रात 9.30 बजे लाठी रॉड से लेकर हमलावर घर में घुसा और यूपी जल निगम में ऑपरेटर रहे मोहनलाल जायसवाल उनकी पत्नी कुसुम देवी उर्फ झुना देवी, बेटा प्रदीप उर्फ गोलू और बेटी पूजा को बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी जबकि हमले में दूसरा बेटा संदीप जायसवाल भी घायल हुआ था, इलाज के बाद उसकी जान बच गई थी। 

घटना के वक्त घर में केवल मृतक की बेटी आरती थी और उसने खुद को दूसरे कमरें में बंद कर के अपनी जान बचाई। यहीं से उसने चाची के मोबाइल नंबर पर फोन कर घटना से अवगत कराया। मामले की जानकरी होने पर हमलोग घर पहुंचे और दीनदयाल अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सकों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को घटना के छह दिन बाद चंदापुर नहर पुलिस के पास से गिरफ्तार किया था।

क्यों हुई हत्या
तत्कालीन एसएसपी राजेश मोडक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपी रविंद्र को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया था कि आरोपी ने चारों हत्याएं की हैं। पुलिस के अनुसार रविंद्र मोहनलाल से नाराज रहता था क्योंकि मोहनलाल उसे अपने घर के पास मांसाहार बनाने और शराब पीने से रोकते थे। 

इतना ही नहीं, मोहनलाल ने इस बात की शिकायत रविंद्र के पिता से भी की थी, जिसके कारण उसे परिवार की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। पुलिस के मुताबिक इसी रंजिश में रविंद्र ने मोहनलाल को सबक सिखाने की योजना बनाई और उनके घर में घुसकर चारों की हत्या कर दी।

बेटे को बचाने में खर्च हो गई सारी कमाई
चार लोगों की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए रविंद्र उर्फ राजू पटेल को अदालत ने फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उसके घर में मातम पसरा हुआ है। घटना के समय उसके पिता कमल पटेल घर पर नहीं थे, जो थे वो उदास दिखे। रविंद्र के पिता कमल पटेल पेशे से ट्रक मिस्त्री हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा रविंद्र पटेल गलत संगत में पड़कर शराब और जुआ खेलने का आदी हो गया था। दादा श्यामनारायण पटेल ने बताया कि बेटे को बचाने में कमल पटेल की कमाई कचहरी के चक्कर में खर्च हो गई। परिवार में अब छोटा बेटा कबींद्र पटेल है जो मैजिक चलाता है।
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13 साल लंबी लड़ाई के बाद भाई को मिला न्याय, पिता की जगह बेटे को मिली नौकरी
अदालत से चार लोगों की हत्या के दोषी रविंद्र उर्फ राजू पटेल को फांसी की सजा मिलने के बाद मृतक के भाई अशोक कुमार जायसवाल ने बताया कि यह लंबी लड़ाई थी। भाई मोहन जायसवाल, भाभी कुसुम देवी उर्फ झुना देवी, भतीजा और भतीजी—सभी को अब जाकर न्याय मिला है। आरोपी ने एक झटके में पूरे खानदान को समाप्त कर दिया था।

आज भी भतीजी आरती उस मंजर को याद कर सिहर उठती है। घटना के बाद वर्ष 2014 में भतीजा और भतीजी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। अदालत के इस फैसले से अब मृत आत्माओं को शांति मिली है। इस दौरान अशोक कुमार जायसवाल भावुक दिखे। उन्होंने बताया कि भाई की नौकरी के दौरान हत्या होने के कारण मृतक आश्रित कोटे के तहत भतीजे संदीप को नौकरी मिली है। 
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