पूर्वांचल के युवाओं ने लेखन के क्षेत्र में मुंबई में अपनी अलग पहचान बना ली है। कला के हर क्षेत्र में वे काफी अच्छा कर रहे हैं। अगर यूं कहें कि पूर्वांचली यूथ एक ब्रांड बन गया है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
यही अवसर है कि यहां के सृजनशील युवाओं को आगे आना चाहिए। गुणवत्ता होगी तो सफलता निश्चित है। ये बातें शनिवार को मशहूर टीवी सीरियलों प्रतिज्ञा, अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो, दो सहेलियां, रिश्तों से बड़ी प्रथा, पलकों की छांव में, डोली अरमानों की, मधुबाला, इश्क का रंग सफेद और सरोजनी के कथा और संवाद लेखक शांति भूषण ने विशेष बातचीत के दौरान कहीं।
वे अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के लिए अपनी टीम के साथ वाराणसी आए हैं। उनका कहना है कि युवा वर्ग के लिए सिर्फ अभिनय ही नहीं है, बल्कि और दूसरे क्षेत्रों में इससे अधिक संभावनाएं हैं, पैसा और नाम भी।
शांतिभूषण का जय संतोषी मां नामक सीरियल का शीघ्र ही प्रसारण शुरू होने वाला है। सुपर हिट फिल्म पीके में आमिर खान के भोजपुरी डायलाग लिखने वाले शांति भूषण मूलत: गाजीपुर जिले के युवराजपुर गांव के हैं। गाजीपुर से ही इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद इनके शिक्षक ने बीएचयू में डॉक्टर बनाने के लिए बीएससी में एडमीशन करा दिया। इनका मन विज्ञान की पढ़ाई में नहीं लगा। पिता ने लखनऊ और फिर इलाहाबाद भेजा। साइंस की पढ़ाई छोड़कर इलाहाबाद में ही सीएमपी डिग्री कॉलेज से बीए किया।
फिर इलाहाबाद के रंगमंच से जुड़ गए। छह वर्षों तक इलाहाबाद में रहने के बाद पहले दिल्ली और उसके मुंबई का रुख किया। मुंबई में पांच-छह वर्षों तक टीवी सीरियलों में छोटे-मोटे रोल और सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। फिर अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो नामक सीरियल की कहानी और संवाद लेखन का अवसर मिला। इसके साथ ही इनकी सफलता की शुरुआत हुई।