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मुख्तार के करीबी मेराज का आखिरी बार चेहरा देख पत्नी बेसुध, घर के बाहर से ही रूखसत हुआ शव

Sat, 15 May 2021 09:54 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

मऊ जिले के सदर विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी मेराजुद्दीन उर्फ मेराज का शव  शनिवार की दोपहर वाराणसी पहुंचा। उसका शव घर के बाहर से ही गाजीपुर के गांव में सुपुर्द-ए- खाक के लिए रूखसत हो गया। मेराज का आखिरी बार चेहरा देख पत्नी बेसुध हो गई।
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गाजीपुर के पैतृक गांव में मेराज का शव पहुंचने के बाद लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चित्रकूट जेल में ईद के दिन अवध के कुख्यात अपराधी अंशु दीक्षित  के बीच हुए गैंगवार में मारे गए मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अहमद का शव शनिवार  सुबह वाराणसी स्थित पहडिय़ा स्थित अशोक विहार कालोनी में पहुंचा। यहां पांच से दस मिनट तक मेराज का शव गाड़ी में रहा और घर की महिलाएं व बुजुर्ग चीखते चिल्लाते हुए  गाड़ी तक पहुंची।

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मेराज का आखिरी बार चेहरा देख पत्नी बेसुध हो गई। माहौल एकदम गमगीन और तल्ख भी रहा। भारी संख्या में मेराज को जानने वाले पहुंचे थे। कई लग्जरी गाडिय़ा अशोक विहार कालोनी के गेट से लेकर मेराज के घर के पास तक खड़ी रहीं। मौजूद हर कोई यही कह रहा था कि मेराज भाई के साथ गलत होई गवा।

चित्रकूट में पोस्टमार्टम के बाद रात में ही शव परिजनों को मिल गया था,  बेटा मिन्हाज और  अन्य रिश्तेदार वाहनों से देर रात शव लेकर वाराणसी के लिए चले और सुबह नौ बजे मेराज का शव पहडिय़ा स्थित अशोक विहार कालोनी में पहुंचा।
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भारी संख्या में लोग यहां थे और पांच मिनट तक घर की महिलाओं को  अंतिम दर्शन कराने के बाद मेराज का शव लेकर परिजन गाजीपुर स्थित करीमुद्दीन थाना के पैतृक गांव माहेन पहुंचे। वाराणसी से मेराज का शव गाजीपुर के लिए चला तो दर्जनों गाडिय़ों का काफिला शामिल रहा। कई सफेदपोश और कारोबारी भी उस काफिले में शामिल रहे। दोपहर में ही मेराज को गांव के पास कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

मऊ विधायक मुख्तार अंसारी का सबसे करीबी मेराज अहमद की हत्या से कालोनी वासियों में सन्नाटा रहा। कालोनी के अधिकतर घरों में ईद की खुशियां मातम में बदली रहीं। किसी ने भी ईद नहीं मनाई। शनिवार सुबह भारी संख्या में लोगों का जुटान मेराज के घर के बाहर रहा और हर कोई इस घटना से दुखी था। कुछ लोग थे जो आपस में बात भी कर रहे थे कि इस घटना ने जेल की पोल खोल दी। आरोप 
भी सरकार पर मढ़ा कि साजिश के तहत हत्या कराई गई।
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...जैसा चाहता था वैसा ही रूतबा पाया मेराज

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी से काफी प्रभावित मेराज अहमद की महत्वाकांक्षाएं काफी थी। इसलिए वह मुख्तार का खास ही नहीं बना बल्कि नक्शे कदम पर चलकर सबकुछ हासिल किया। जैसा रूतबा चाहता था वैसा ही वह पाया। भले ही जेल में उसकी हत्या कर दी गई लेकिन जब उसका शव पहुंचा तो सैकड़ों लोगों की भीड़ और लग्जरी गाडिय़ों का काफिला उसके साथ चला।

यहां बस सिर्फ एक कमी थी कि मेराज की आंखें हमेशा हमेशा के लिए मूंदी हुई थी। काफिले में शामिल कुछ लोग थे, जो यह बता रहे थे कि गांव में जब मेराज का शव काफिला के साथ पहुंचा तो भीड़ हजार के पार थी। लोगों को जुटाकर एक साथ चलना मेराज को अच्छा भी लगता था।
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