इसके बाद जनाब शेमू अब्बास साहब ने नौहाख्वानी की। सुजायत आबिदी और जावेद आबिदी ने भी अपने कलाम पेश किए। अंजुमन सज्जादिया असगरिया की ओर से काशिफ साहब ने नौहा पढ़ा, जबकि अंजुमन के साहिबे बयाज नवाब फराज़ हुसैन साहब ने हजरत सकीना की मासूमियत और उन पर हुए अत्याचार को बयान करता दर्दभरा नौहा सुनाया। “मेरे बाबा हो कहां, बैन करती है सकीना, मेरे बाबा हो कहां” सुनकर मातमदारों ने सीना पीटकर अपना गम व्यक्त किया।
क्षेत्र की ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा से जुड़े इस कदीमी जुलूस में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। स्थानीय मान्यता के अनुसार संतान सुख की कामना करने वाली महिलाएं दुलदुल के सामने मन्नत मांगती हैं। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं ने जुलूस में शामिल होकर दुआएं मांगीं।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रभारी निरीक्षक मुगलसराय विजय प्रताप सिंह ने स्वयं सुरक्षा प्रबंधों की निगरानी की। इस अवसर पर खादिम-ए-जुलूस एवं पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राहिब जाफरी ने पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। जुलूस में नक्कन जाफरी, कल्बे अब्बास जाफरी, बबलू अब्बास, सैयद आले अब्बास, उरूज हैदर, शोले प्रधान, हमीदुल्लाह प्रधान सहित हजारों अकीदतमंद मौजूद रहे।