Varanasi News: अलम और दुलदुल की जियारत के लिए वाराणसी में विभिन्न स्थानों पर जुलूस निकाले गए। कर्बला के 72 शहीदों को याद करने के लिए सैकड़ों की तादाद में लोगों ने शिरकत की। इसके बाद या हुसैन की सदाओं के साथ अलम और दुलदुल का जुलूस निकाला गया।
आज तक हम कर्बला की दास्तां भूले नहीं, वो जमीं भूले नहीं वो आसमान भूले नहीं...से सदर इमामबाड़े का पूरा प्रांगण गुंजायमान हो उठा। हिजरी के आगाज के साथ ही पहली मुहर्रम पर अलम और दुलदुल की जियारत के लिए अकीदतमंदों का रेला उमड़ पड़ा। शहर भर के इमामबाड़ों और घरों में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। सुबह से देर रात तक नौहा मातम का दौर चलता रहा।
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सोमवार को सदर इमामबाड़े के 14वें साल पहली मुहर्रम को हाजी फरमान हैदर के संयोजन और मुतवल्ली सज्जाद अली गज्जन की निगरानी में अलम और दुलदुल का जुलूस उठाया गया। जुलूस में संयुक्त रूप से कई अंजुमनों ने एक साथ शिरकत करके पैगाम ए हुसैनी सारी दुनिया तक पहुंचाया।
उन्होंने संदेश दिया कि अंजुमनें जरूर अलग हैं लेकिन नामे हुसैन पर हम सभी एक हैं। सोजख्वानी से मजलिस का आगाज हुआ, इसके बाद अतश बनारसी, जफर बनारसी, फैजी बनारसी ने कलाम पेश करके खिराज ए अकीदत पेश किया।
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मजलिस को खिताब करते हुए जनाब मौलाना कासिम अली ने कहा कि इमाम हुसैन ने कभी घुटने नहीं टेके और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की।
इमाम हुसैन के रौजे के पास नोहा और मातम के साथ जुलूस का समापन हुआ। इस अवसर पर नौहाख्वानी के लिए शामिल बनारसी, अनवर बनारसी, अनवार, सरदार, अलमदार हुसैन मौजूद रहे। दूसरी मुहर्रम पर शिवपुर में अंजुमन ए पंजेतनी के जेरे इंतजाम दुलदुल उठाया जाएगा।