बनारस रेल इंजन कारखाना (बीएलडब्ल्यू) परिसर और उसके आसपास के विस्तारित नगर निगम क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही जलभराव की गंभीर समस्या का अब स्थायी समाधान होने जा रहा है।इसके लिए मंगलवार को नगर निगम और बरेका के बीच एमओयू हुआ। राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा और बीएलडब्ल्यू के महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
मेयर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि बीएलडब्ल्यू प्रशासन और नगर निगम वाराणसी के बीच जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस योजना से क्षेत्र की 1.50 लाख (डेढ़ लाख) आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। 45.03 करोड़ रुपये की लागत से नाले का निर्माण होगा। मानसून के दौरान होने वाली दुश्वारियों से मुक्ति मिलेगी।
बनेगा आधुनिक ड्रेनेज नेटवर्क
जल निकासी नेटवर्क को दो हिस्सों में बांटकर काम पूरा किया जाएगा। बीएलडब्ल्यू की सीमा (भूमि) के भीतर नाले के निर्माण पर 24 करोड़ रुपये बरेका खर्च करेगा। वहीं, बीएलडब्ल्यू परिसर की सीमा के बाहर 21.03 करोड़ रुपये का खर्च नगर निगम करेगा। इस तरह कुल 45.03 करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी स्टॉर्म वाटर ड्रेन विथ कवर (ढके हुए पक्के नाले) का निर्माण कराया जाएगा।
कंदवा और पहाड़ी गेट के पास नहीं रुकेगा पानी
मेयर के मुताबिक बरेबा और उसके आसपास के इलाके के स्थलीय निरीक्षण में पाया गया था कि वहां नालों की क्षमता बेहद कम है और कई स्थानों पर नाले अवरुद्ध व क्षतिग्रस्त हैं। इस कारण कंदवा गेट और पहाड़ी गेट के आसपास मानसून के समय व्यापक जलभराव की स्थिति बन जाती है। इससे स्थानीय निवासियों, राहगीरों, जनस्वास्थ्य और यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ता था। अब कंदवा गेट और पहाड़ी गेट के पास नाला-1 और नाला-2 नाम से नए आरसीसी स्टॉर्म वाटर ड्रेन का निर्माण कराया जाएगा। इससे वर्षा जल का त्वरित और सुव्यवस्थित निकास संभव हो सकेगा।
-
बीएलडब्ल्यू परिसर की सड़कों और ढांचों को मिलेगी सुरक्षा
बीएलडब्ल्यू परिसर की बाउंड्री वॉल के साथ-साथ परिसर के आंतरिक भागों में भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से आवासीय एवं कार्यालय परिसर जलमग्न हो जाते थे। इससे रेल कर्मचारियों, उनके परिवारों और आमजन को आवागमन में भारी परेशानी होती थी और बुनियादी ढांचे (सड़क व नागरिक अवसंरचना) को नुकसान पहुंचता था। नए प्रोजेक्ट के तहत बीएलडब्ल्यू बाउंड्री वॉल और आंतरिक क्षेत्रों में भी ढके हुए ढके नालों का निर्माण कर इस समस्या का हमेशा के लिए खात्मा कर दिया जाएगा।