संजय प्राइवेट नौकरी करते थे पर बीमारी की वजह से नौकरी भी छूट गई। इलाज में परिवार के बचे हुए पैसे और गहने तक बिक गए। कक्षा पांच और दो में पढ़ने वाले प्रिंस और रौनक की पढ़ाई भी छूट चुकी है। सुमन ने बताया कि पति की तबीयत बिगड़ने के बाद आयुष्मान भारत योजना के लिए कई बार आवेदन किया मगर उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।
गंभीर रूप से बीमार पति का महंगा इलाज कराने की ताकत नहीं बची मगर वह अपने पति को मरता हुआ नहीं देख सकती। वहीं खाने के लाले पड़ गए हैं। इस वजह से वह बच्चों के साथ इच्छा मृत्यु मांग रही है। कचहरी परिसर में कुछ लोगों ने महिला को रविंद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय जाने की सलाह दी। दोपहर बाद सुमन ने संसदीय कार्यालय पहुंचकर मदद की गुहार लगाई।