सर्विलांस की मदद से पता लगा कि विजय यादव का करीबी लखनऊ में रहने वाला और मऊ जिले के सरायलखंसी थाने के इमिलिया चांदपुर निवासी धर्मेंद्र मौर्या ने उसकी पत्नी सोनी यादव व बेटे शिवम यादव को मोहाली स्थित एक होटल में शरण दिला रखी है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मार कर तीनों को गिरफ्तार किया और उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर वाराणसी लेकर आई। अदालत में पेश कर तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। तीनों के पास से आठ मोबाइल, 18 सिम, चार आधार कार्ड, तीन एटीएम कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और 400 रुपये बरामद हुए।
गिरफ्तार सोनी और उसके बेटे शिवम ने पुलिस को बताया कि विजय यादव और राजकुमार यादव के बीच सारनाथ क्षेत्र के कीमती जमीन को लेकर विवाद था। रिश्तेदारी की एक लड़की से दुष्कर्म के आरोप में विजय जेल में बंद है। उस मामले में राजकुमार प्रभावी तरीके से पैरवी कर रहे थे। इससे खार खाकर विजय ने राजकुमार की हत्या की साजिश लगभग एक महीने रची। जब वह गाजीपुर जेल से वाराणसी पेशी पर आया था तो उसके सभी करीबी मिले। विजय ने अपने साथी कॉलोनाइजर अनिल यादव को राजकुमार की हत्या के लिए शूटरों की व्यवस्था करने को कहा। सुबह बेटे को स्कूल छोड़ने जाने के दौरान वारदात को अंजाम देने की बात तय हुई।
सोनी और शिवम ने बताया कि राजकुमार की हत्या से एक दिन पहले दोनों धर्मेंद्र मौर्या के द्वारा लखनऊ में बताए हुए ठिकाने पर चले गए थे। उससे पहले दोनों ने नया सिम ले लिया था और पुराने सभी नंबर बंद कर दिए थे। 14 जुलाई को राजकुमार को गोली मारी गई तो धर्मेंद्र वाराणसी में ही था। गोली मारे जाने की खबर पुष्ट हो गई तो धर्मेंद्र लखनऊ आ गया। धर्मेंद्र के साथ दोनों दिल्ली गए। विजय के साथ धर्मेंद्र लगभग 15 साल से से जुड़ा था और अवैध शराब की तस्करी के काम में उसकी गहरी पैठ है। शराब तस्करों की मदद से ही धर्मेंद्र चंडीगढ़ और मोहाली में दोनों को ठिकाने बदल-बदल कर ठहराए हुए था।
सोनी और शिवम ने बताया कि राजकुमार यादव की हत्या विजय यादव ने ही कराई है, यह बात तय है। गोली मारने वाले शूटरों के बारे में विजय का दोस्त अनिल यादव ही बता सकता है। बता दें कि राजकुमार यादव की हत्या के मामले में पुलिस को अभी दो शूटरों के साथ ही सारंगतालाब क्षेत्र के रहने वाले अनिल यादव, विजय यादव की दूसरी पत्नी आरती यादव, पिंटू यादव उर्फ आशुतोष, रोहित यादव और चाट विक्रेता रविंदर की तलाश है।