धर्मनगरी काशी में रामकथा मर्मज्ञ संत मोरारी बापू ने सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की। डोमराज के घर का बना भोजन चखकर सामाजिक गैर बराबरी और जाति पात के भेदभाव को दूर करने का बड़ा संदेश दिया। वह डोमराज परिवार की मुखिया बड़की मालकिन के हाथ का बना भोजन पाकर भावुक हो उठे।
विज्ञापन
बापू ने कहा कि जन्म से कोई बड़ा छोटा नहीं होता। बड़की मालकिन के नाम से जानी जाने वाली डोमराज परिवार की मुखिया जमुना देवी अपने परिवार के सदस्यों के साथ शनिवार की सुबह नौ बजे कथा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बापू के लिए अपने हाथ से पूड़ी, सब्जी और हलवा बनाया था।
जब बड़की मालकिन का संदेश बापू को मिला तो उन्होंने तत्काल उन्हें आदर पूर्वक बुलवाया। बापू ने व्यासपीठ पर ही बड़की मालकिन के हाथों से भोजन प्राप्त किया। इस दौरान कथा पंडाल में उमड़ी हजारों की तादाद में भीड़ हर हर महादेव के जयकारे लगाने लगी। बापू भावुक हो उठे।
विज्ञापन
कथा के बाद उन्होंने बड़की मालकिन के हाथ का बना भोजन ग्रहण किया। बापू ने संदेश दिया कि कोई छोटा-बड़ा या अछूत नहीं होता। मसान ही सत्य और शुद्ध है।
कथा के दौरान शनिवार को पंडाल में जब बड़की मालकिन मोरारी बापू के लिए भोजन लेकर पहुंचीं तब डमरूनाद होने लगा। डमरूदल के सदस्यों ने भगवान शिव के प्रिय वाद्य डमरू को बजाकर उन क्षणों को यादगार बना दिया। नौ दिवसीय रामकथा मानस मसान का विराम रविवार को हो गया। काशी में यह राम काथा 21 अक्तूबर से चल रही थी।
मोरारी बापू ने गंगा-बेटी दोनों को बचाने का किया आह्वान
सतुआ बाबा की गोशाला में नौ दिवसीय ‘मानस मसान’ आरंभ
- फोटो : अमर उजाला
‘मानस मसान’ रामकथा में संत मोरारी बापू ने शनिवार को गंगा और बेटी दोनों को बचाने का आह्वान किया। कहा कि बेटियों के सम्मान से राष्ट्र में समृद्धि और खुशहाली आएगी। गंगा निर्मलीकरण के लिए युवाओं से आगे आने की अपील की। कहा कि गंगा से पावन धारा कोई धारा नहीं है। तीर्थों को गंदगी से बचाना होगा।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा पार सतुआ बाबा के गोशाला परिसर में कथा के आठवें दिन बापू ने व्यास पीठ से सीता स्वयंवर प्रसंग पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि राम नाम से ही विश्व का कल्याण हुआ है।
प्रलय होने पर अंत में भी राम नाम ही बचेगा। बापू ने स्वच्छता अभियान को साकार करने पर बल दिया। कहा कि पवित्रता में कभी कोई कमी नहीं रही है। काशी में ‘हर हर महादेव’ का नाद वातावरण की शुद्धि करता है। उन्होंने गंगा निर्मलीकरण को कारगर बनाने पर जोर दिया।
कहा कि महादेव ने जिस गंगा को सिर पर धारण कर रखा है, उसमें हम कचरा न डालें। उन्होंने काशी की महिमा का बखान किया। कहा कि काशी आनंद का वन है।
यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और मणिकर्णिका घाट के निकट स्थित कुंड में भगवान शिव ने स्नान किया था। मणिकर्णिका घाट काशी का मुखचंद्र है और इसमें कोई कलंक नहीं है।
मोरारी बापू ने सास-बहू के झगड़ों को दूर कर परिवार में प्रेम और शांति का वातावरण तैयार करने का संदेश मानस के जरिए दिया। कहा कि हर सास अपनी बहू में जानकी देखने लगेगी तो बहू अपनी सास में कौशल्या देखेगी। सास और बहू के बीच प्रेम भरा इस तरह का रिश्ता होगा तो हमारे देश का भला हो जाएगा।
कहा कि घर में जब बेटी आए तो उत्सव मनाना चाहिए। इसलिए कि कन्या के रूप में सात विभूतियां आती हैं। कन्या जन्म से राष्ट्र में संपत्ति, विभूति और ऐश्वर्य बढ़ता है। कन्या शक्ति, विद्या, श्रद्धा, क्षमा का रूप है, उसका स्वागत करना चाहिए।
देह नहीं स्नेह से होता है बुद्ध पुरुष का संबंध
जहां पांच वस्तुएं होती है, वहीं तीर्थ है। जहां जल, तप, वन, अग्नि और मंत्र निरंतर प्रकट हों, वहां तीर्थ है। प्रत्येक मसान तीर्थ है और मणिकर्णिका घाट महान तीर्थ है। मसान शिव के लिए क्रीड़ा स्थली है।
जीव के लिए जागरण की स्थली है और शव के लिए विश्राम स्थली। बापू ने कहा कि विवेक की प्राप्ति और वृद्धि साधु संगति से ही होती है। बुद्ध पुरुष और परमात्मा का किसी से देह संबंध नहीं बल्कि स्नेह संबंध होता है।