सोमवार को मौसम विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में 16 दिनों में सिर्फ 1.6 एमएम ही बरसात हुई जबकि बिना मानसून के आए सामान्य तौर पर इतने दिनों में 23.3 एमएम वर्षा दर्ज की जाती रही है। इसके अलावा पूर्वी यूपी के जिलों में 64 फीसदी कम बारिश हुई है। सामान्य तौर पर 30 एमए बारिश होनी थी जबकि सिर्फ 11 एममए की पानी गिरा है। जबकि पश्चिमी यूपी में औसत से सिर्फ 10 फीसदी कम बरसात हुई है। वहीं प्रादेशिक तौर पर 27.6 एमएम से 46 फीसदी नीचे सिर्फ 15 एमएम ही बादल बरसे।
पेड़ों कम होने से बारिश की कमी
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक हरित इलाकों के घटने के चलते ऐसी खराब स्थिति बन रह है। पेड़ों की कटाई खूब है। तापमान को कम करने वाले इन पेड़-पौधों के कम होने से पारा इतना ऊपर चला जा रहा है कि हवा में नमी धारण की क्षमता ही बढ़ जा रही है और उससे बारिश की बूंदें भाप में तब्दील होती जा रहीं हैं और बारिश न के बराबर है।
बनारस का न्यूनतम पारा 30.8 डिग्री सेल्सियस
सोमवार को बनारस में बादल छाए रहने के बावजूद दिन का तापमान सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस ऊपर चला गया। शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.1 डिग्री ज्यादा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक चला गया है। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.8 ज्यादा 30.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। आर्द्रता 63 प्रतिशत तक चली गई। इससे उमस ने बेहाल कर दिया। पुरवा हवा 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बही। इसकी वजह से लू जैसी स्थिति बनी रही। यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, बनारस समेत पूरे प्रदेश में अब बारिश वाली स्थिति बन गई है। 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से बह सकती है।