मध्य प्रदेश में गिरफ्तार भदोही जिले के ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा का पूर्वांचल के जरायम जगत में एक अलग ही किस्म का दबदबा है। हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर विजय मिश्रा हमेशा एक ही बात दोहराते हैं कि वह बाहुबली नहीं बल्कि जनबली हैं। उनके खिलाफ ज्यादातर मुकदमे राजनीतिक प्रतिशोध में दर्ज कराए गए हैं, जिनमें से कई में वह अदालत से बरी भी हो चुके हैं।
विजय मिश्रा और बनारस में उनके आपराधिक कनेक्शन की बात करें तो रवींद्रपुरी निवासी विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और पूर्वांचल के बड़े कोयला व्यवसायी नंद किशोर रूंगटा का जिक्र सबसे पहले आता है। 22 जनवरी 1997 की शाम बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया था। रूंगटा को छुड़ाने के लिए दो करोड़ की फिरौती दी गई थी।
इसके अलावा पूर्वांचल के अन्य चर्चित मामलों की बात करें तो 2002 में भदोही के गोपीगंज क्षेत्र के घनश्यामपुर गांव में पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के भाई रामेश्वर पांडेय की हत्या, प्रयागराज में 2003 में डीआईजी के यहां तैनात सिपाही सूर्यमणि मिश्रा की हत्या, प्रदेश के पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी के भाई डॉ. धरणीधर त्रिपाठी की हत्या और जुलाई 2010 में प्रयागराज में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी पर जानलेवा हमले के मामले में विजय मिश्रा का नाम आया। इनमें से कुछ मामलों में विजय मिश्रा निचली अदालत से बरी भी किए जा चुके हैं।
विधायक विजय मिश्रा के राजनीतिक विरोधियों की सूची बड़ी है। प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री राकेशधर त्रिपाठी और पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय अपने-अपने भाई की हत्या आज भी नहीं भूल पाए हैं। वहीं, प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रंगनाथ मिश्र के अलावा हाल ही में मुखर हुए भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी से भी विजय मिश्रा की सियासी अदावत छुपी नहीं है।