कॉमनवेल्थ गेम्स में भले ही काशी की बेटी और वेटलिफ्टर पूनम यादव को पदक नहीं मिल पाया, लेकिन हार से उनका हौसला नहीं टूटा है। वह पोडियम पर फिर से कमाल दिखाने की तैयारी में जुट गई हैं। अमर उजाला से बातचीत में पूनम ने बताया कि पदक से चूकने पर दुखी तो हूं, लेकिन हौसला बरकरार है। मंगलवार को फाइनल मुकाबले में वेट उठाते समय हाथ मुड़ गया, इस वजह से वेट रखना पड़ा। पूनम ने कहा कि शायद आज का दिन मेरे लिए ठीक नहीं था। वेट उठाने के बाद मुझे रेफरी की फाइनल विसिल भी सही तरीके से नहीं सुनाई पड़ी। इस वजह से वेट उठाकर नीचे रख दिया।
हरहुआ ब्लॉक के दांदूपुर निवासी कैलाश की पांच बेटियों और दो बेटों में पूनम चौथे नंबर पर हैं। पूनम ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में कांस्य और ऑस्ट्रेलिया के गोलकॉस्ट में 2018 में स्वर्ण जीत चुकी हैं। पूनम ने बताया कि इस साल एशियन गेम्स चीन में सितंबर में होना था, लेकिन कोरोना की वजह से इसे टाल दिया गया है। अब पूरा फोकस इस साल गुजरात में 27 सितंबर से 10 अक्तूबर तक होने वाले नेशनल गेम्स पर रहेगा। इसी सप्ताह से तैयारी शुरू हो जाएगी। बर्मिंघम से पांच अगस्त को निकलेंगी और अमृतसर छह अगस्त को पहुंचेगी। यहां से पटियाला कैंप में जाएंगी। बताया कि नेशनल गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
परिजनों, ग्रामीण, रेल प्रशासन ने की सराहना
पूनम भले पदक से चूक गईं, लेकिन हर कोई उनकी सराहना कर रहा है। परिजनों के साथ ही गांव वालों और रेल प्रशासन ने मंगलवार को उनकी सराहना की। पिता कैलाश यादव ने बताया कि 1990 में कर्णम मल्लेश्वरी से प्रेरित होकर पांचों बेटियों को भारोत्तोलन के लिए प्रेरित किया। दो बेटियां नहीं खेल र्पाइं। जबकि पूजा और शशि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में काशी का मान बढ़ा रही हैं। पूनम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में लोहा ले रही हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के खेल सचिव अनिल सिंह ने बताया कि कैंट स्टेशन पर चेकिंग स्कॉट में शामिल पूनम का पिछला रिकॉर्ड काफी अच्छा है।