मिर्जापुर लूट और गार्ड की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
मिर्जापुर जिले में पहली बार हत्या के बाद कैश वैन से लूट मामले में न सिर्फ रेंज की बल्कि जोन की पुलिस टीम को लगा दिया गया है, एडीजी जोन स्वयं डेरा डाले हैं, पर घटना के दो दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस को अपराधियों के बारे में अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है। कैश वैन लूट और हत्या की अब तक की यह जिले में पहली घटना है। घटना की गंभीरता को देखते हुए एडीजी जोन वाराणसी रामकुमार मंगलवार से जिले में डटे हैं। पूरे जोन की पुलिस अपराधियों को पकड़ने में लगी है। पूर्वांचल के सभी जिलों के साथ बिहार और मध्य प्रदेश के बार्डर पर भी अपराधियों के बारे में पता कराया जा रहा है। तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है, पर अब तक पुलिस को अपराधियों के बारे में पता नहीं चल सका है। छानबीन में पुलिस को सिर्फ एक अपराधी का फोटो मिली है।
घटना के वर्क आउट के लिए रेंज के साथ जोन की भी टीमें लगी हैं। एडीजी जोन रामकुमार घटना के बाद मौके पर पहुंचे थे। उसके बाद से नगर में रुके हैं। वह बुधवार की सुबह से पुलिस लाइन में डीआईजी आरपी सिंह और पुलिस अधीक्षक अभिनंदन के साथ वर्कआउट करने में लगे हैं। मंगलवार की रात से ही रेंज के तीनों थानों के क्राइम ब्रांच की टीम और सीओ को लगाया गया है। साथ ही भदोही, सोनभद्र के तेज तर्रार निरीक्षक और उप निरीक्षकों को बुलाया गया है, जो पहले जिले में तैनात रह चुके हैं। साथ ही पहले कैश वैन लूट घटना का खुलासा करने वाले लोगों को लगाया गया है।
चील्ह बाजार निवासी जय सिंह की मौत के बाद कैश वैन कंपनी रेडियंट कैश मैनेजमेंट सर्विस लिमिटेड के अधिकारी रात में ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और 20 हजार रुपये परिजनों को दिया। कंपनी के अधिकारी उत्तरी क्षेत्र के प्रबंधक वीर गोविंद सिंह बुधवार की सुबह में कटरा कोतवाली में जय सिंह के चचेरे भाई नितीश सिंह, भतीजा अभिषेक सिंह, चील्ह ग्राम प्रधान के पति अनिल यादव, जय सिंह की पत्नी सचिता देवी को कंपनी के नियमानुसार एक लाख रुपये 72 घंटे में और बीमा की राशि तीन लाख एक माह के अंदर देने की बात कही।
आखिरी वेतन की धनराशि और लड़कियों के बालिग होने तक उनके ग्रेजुएट तक की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात पर सहमति बनी। कंपनी व पुलिस के अभिलेख में समझौता दर्ज कराया गया।