सीएम योगी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह
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सरकार बदलने के बाद अब धीरे-धीरे भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। श्रावस्ती में तैनात ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता केसी श्रीवास्तव ने बिना काम कराए ही सोनभद्र में ठेकेदारों को दो करोड़ का भुगतान कर दिया।
विभागीय जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने केसी श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। मंत्री ने बुधवार को वाराणसी में सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि केसी श्रीवास्तव के पास आठ जिलों का प्रभार था। उनके कार्यकाल के सभी कार्यों की जांच टीएसी एवं एसी स्तर के अधिकारी से कराई जाएगी। मंत्री ने कहा कि उनके विभाग में प्रभार का खेल चल रहा है।
एक इंजीनियर के पास कई जिलों का प्रभार है। कई इंजीनियर एक ही जिलों में दस-दस वर्षों से जमे हुए हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। प्रभार का खेल खत्म होगा। एक जिले में तीन साल से ज्यादा समय तक रह चुके इंजीनियरों का तबादला होगा। जितने भी गड़बड़ काम हुए हैं सबकी जांच कराई जाएगी।
निलंबन के साथ ही समय से पूर्व रिटायरमेंट भी दे दिया जाएगा। यदि घोटाला हुआ तो इंजीनियर के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मुकदमा भी होगा।
वाराणसी, बलिया, आजमगढ़ और सोनभद्र का काम बेहद खराब
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को सर्किट हाउस में वाराणसी, आजमगढ़ एवं मिर्जापुर के विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। आजमगढ़, बलिया, वाराणसी, मिर्जापुर एवं सोनभद्र जिले का कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया जबकि गाजीपुर जौनपुर एवं प्रतापगढ़ जिले में अच्छा कार्य किया गया है।
आजमगढ़ एवं अन्य जिलों में कराए गए लोहिया ग्राम की सड़कों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क, आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण एवं सीसी रोड एवं केसी ड्रेन के कार्यों की सघन जांच करने का निर्देश दिया।
कहा कि यदि इन कार्यों में कहीं भी आर्थिक भ्रष्टाचार संज्ञान में आया तो संबंधित अभियंताओं के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं एवं निर्माण कार्यों का गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय अवधि में कार्य पूरा कराएं।