वाराणसी। बीएचयू में चल रहे अंतर संकाय युवा महोत्सव स्पंदन-2015 के तीसरे दिन रविवार को छात्र-छात्राओं ने गीत-संगीत की धुनों पर नृत्य की उम्दा प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं। साथ ही मंचन के जरिये भ्रष्टाचार और आतंकवाद पर चोट की। युवाओं ने नाटक एवं मूक अभिनय की प्रस्तुतियों के माध्यम से कुरीतियों से मुक्त सशक्त, स्वच्छ एवं सुंदर भारत के निर्माण का संदेश दिया।
स्वतंत्रता भवन में वीकेएम की छात्रा विदुषी जायसवाल ने ‘द्रोपदी का चीर हरण’ में नारी उत्पीड़न की व्यथा-कथा को नृत्य के जरिये प्रस्तुत किया। बसंता कालेज की श्रीलक्ष्मी ने शिव तांडव से वाहवाह लूटी। कृषि विज्ञान संस्थान की टीम ने नाटक ‘सच समाज का’ की प्रस्तुति से महिला उत्पीड़न, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा और को उजागर किया। डीएवी कालेज की टीम ने मूक अभिनय से भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याओं को सामने रखा और इनसे मुक्ति के लिए उठ खड़े होने का आह्वान किया। विधि संकाय के छात्रों ने
भी मूक अभिनय स्वच्छ भारत और सुंदर भारत तो सामाजिक विज्ञान के छात्रों ने एकजुटता और भाईचारे का संदेश दिया। कला संकाय की टीम ने ‘देखो हमरी काशी’ के मंचन से शहर की मस्ती और घाटों की महत्ता को प्रदर्शित किया। आईआईटी के छात्रों ने ‘बड़े भाई साहब’, कला संकाय ने ‘हम जमीन’ नाटक से समाज के परिदृश्य को सामने रखा। इसके अलावा संस्कृत और अंग्रेजी में भाषण एवं कविताएं हुई। एंफीथिएटर, स्वतंत्रता भवन, केएन उडुप्पा सभागार, आरके हाल, दृश्य कला संकाय में कुल 22 प्रतियोगिताएं हुई, जिनमें चार सौ छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।