पहले काशी का ‘ट्रैफिक पैटर्न’ समझा जाएगा, उसके बाद यहां मेट्रो रेल के रूट फाइनल किए जाएंगे। काशी के ट्रैफिक और ट्रांसपोर्टेशन का पैटर्न समझने के लिए रेलवे की तकनीकी संस्था राइट्स की ओर से विशेषज्ञों की टीम यहां भेजी जाएगी।
जो यहां रहकर शहर के विभिन्न हिस्सों में यातायात के दबाव, चौराहों की स्थिति, सड़कों की चौड़ाई का अध्ययन करेगी और अपने सुझाव राइट्स के अधिकारियों को देगी। इसके अलावा, शहर की मिट्टी के परीक्षण के लिए जिओ टेक्निकल सर्वे कराया जाएगा।
पिछले दिनों मेट्रो रूट के सर्वे के लिए राइट्स की टीम यहां आई थी। तब वीडीए सचिव ने शहर के ट्रैफिक मोबिलिटी प्लान की प्रति उसे सौंपी थी, लेकिन उसके पुराना होने के कारण अब मेट्रो परियोजना के लिए यहां के ट्रैफिक पैटर्न का नए सिरे से अध्ययन किया जाएगा। अपने सर्वे के दौरान शहर में तीन दिन रह कर राइट्स के अधिकारियों ने ‘वाराणसी महायोजना 2031’ के अनुसार प्रस्तावित चार मेट्रो रूट का जायजा लिया था।
साथ ही, लंका से डीरेका और लंका से सामने घाट वाया पड़ाव तक मेट्रो रेल के लिए नया रूट सुझाते हुए पूरे शहर का तीन बार मुआयना किया था। मेट्रो रेल परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने संबंधी करार वीडीए और राइट्स के बीच होते ही इस संबंध में ठोस कवायदें शुरू हो जाएंगी। डीपीआर तैयार होने से पहले काशी के ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट पैटर्न का अध्ययन राइट्स के विशेषज्ञ करेंगे। इसके साथ ही मेट्रो रेल के लिए शहर की मिट्टी कैसी है, इसका परीक्षण करने के लिए जिओ टेक्निकल सर्वे कराया जाएगा।
लखनऊ मेट्रो की तर्ज पर यदि तेजी से काम हुआ तो ये दोनों काम आठ से दस महीने में पूरे हो जाएंगे। फिर इस बारे में सभी विभागों की राय और अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद डीपीआर बनाने का काम शुरू किया जाएगा। वीडीए के अभियंताओं ने बताया कि राइट्स के अधिकारी जल्द ही वापस आने को कह कर गए हैं। ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट पैटर्न के अध्ययन और जिओ टेकिभनकल सर्वे के काम में हमारी ओर से उन्हें पूरी मदद दी जाएगी।