केंद्र सरकार के नए फैसले से वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में मेट्रो दौड़ाने के सपने का तगड़ा झटका लगा है। नई मेट्रो रेल पॉलिसी के चलते केंद्र को भेजी गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) वापस कर दी गई है।
परियोजना पर केंद्र की स्वीकृति के लिए अब डीपीआर में बदलाव करने होंगे। मेट्रो की राह में नई अड़चन के बाद इस परियोजना की नोडल संस्था वीडीए को अब शासन के आदेश का इंतजार है।
वाराणसी के साथ ही यूपी के पांच और शहरों की भी डीपीआर लौटा दी गई है। इनमें कानपुर, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद और गोरखपुर शामिल है।
16 अक्तूबर, 2016 को मेट्रोमैन श्रीधरन ने बीएचयू से भेल और बेनियाबाग से सारनाथ तक 29 किमी लंबे मेट्रो कॉरिडोर परियोजना का खाका खींचा था। उन्होंने प्रस्तावित मेट्रो रूट का निरीक्षण भी किया था।
तब श्रीधरन ने 2021 तक पहले चरण में मेट्रो चलाने की बात कही थी। वाराणसी में इस परियोजना पर 17.258 हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे।
केंद्र ने नई पॉलिसी के हिसाब से डीपीआर में कई संशोधन करने के लिए शहरी विकास विभाग को प्रस्ताव वापस भेजा है।