बीएचयू में गिफ्ट की खरीद के लिए बनाई गई फर्मों को बनारस में ढूंढ पाना गंगा में जौ बोने के बराबर हो गया है। जिन पांच फर्मों के नाम पर स्मृति चिह्न, गिफ्ट आइटम और अन्य वस्तुओं की खरीद की गई है, उनके कोटेशन आर्डर में दिए गए पते ही फर्जी हैं। जिन मकान नंबरों का उल्लेख फर्मों के पते के रूप में किया गया है, वह उन मोहल्लों में हैं ही नहीं। यानी लाखों रुपये के गिफ्ट की खरीद कागजों पर जाली फर्मों के नाम पर की गई है।
अमर उजाला में गिफ्ट खरीद में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद पुरा छात्र प्रकोष्ठ (अल्युमनी सेल) में हड़कंप मच गया है। पुरा छात्र प्रकोष्ठ के समन्वयक को उपहारों की खरीद का इस्टीमेट देने वाली फर्मों के नाम, पते ढूंढने में पसीने भी छूट गए हैं। दरअसल, इस घोटाले में ऐसी फर्मों के पते दिए गए हैं, जिनके भवन नंबर नगर निगम ने अब तक आवंटित ही नहीं किए हैं। भवन संख्या डी 57/38 के पते वाली फर्म गिफ्ट गैलरी को लक्सा रोड, रामापुरा में दिखाया गया है, जबकि इस क्रमांक के नंबर सोनिया-सिद्धगिरी बाग मोहल्ले में आवंटित किए गए हैं। इस नाम की फर्म रामापुरा में नहीं मिल रही है। इसी तरह अवार्ड प्वाइंट का पता बी 21/8 सोनारपुरा दिया गया है। सोनारपुरा में भी इस क्रमांक की सीरिज से भवनों का आवंटन नगर निगम ने नहीं किया है।
अवार्ड प्वाइंट फर्म को न तो इस मोहल्ले के लोगों ने देखा है न कभी इसका नाम सुना। इस क्रमांक के भवन मानसरोवर मोहल्ले में आंवटित किए गए हैं। भवन संख्या बी 21/92 बैजनत्था (कमच्छा) के पते पर मोमेंटो हाउस दिखाया गया है। इस क्रमांक पर आदि शंकराचार्य मठ परिसर है। इस क्रमांक के भवन में मजदूरी करने वाले नखड़ू प्रसाद मिले। उनका कहना है कि इस फर्म के बारे में उन्होंने कभी सुना तक नहीं है। मठ परिसर में आदि शंकराचार्य कॉलोनी भी है, जहां रहने वाले देवेंद्र पांडेय और शशांक यादव का भी कहना है कि उन्होंने मोमेंटो हाउस नाम की कोई दुकान कभी नहीं देखी। इसी तरह व्यू इंडिया नाम की फर्म सीके 54/19 के पते की तस्दीक नहीं हो सकी। वहां भेजी गई डॉक वापस आ गई है। इसी तरह बैग की खरीद के लिए कोटेशन देने वाली फर्मों के भी नाम और पते फर्जी मिले हैं।
वहीं, पुरा छात्र प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. शशि भूषण अग्रवाल तीन जुलाई तक का अवकाश लेकर अमेरिका चले गए हैं। निजी कारणों के विदेश यात्रा के लिए उन्होंने अवकाश लिया है। प्रो. अग्रवाल ने पुरा छात्र प्रकोष्ठ के समन्वयक का प्रभार ट्रेजरार प्रो. बीके सिंह को सौंप दिया है। ट्रेजरार को समन्वयक का चार्ज दिए जाने पर भी उंगली उठ रही है। कहा जा रहा है कि नियमत: सेल के वरिष्ठ सदस्य को प्रभार देना चाहिए था। बता दें कि प्रो. अग्रवाल इस घोटाले की शिकायत के बाद सात मई को अमेरिका चले गए थे, जबकि उनके खिलाफ जांच समिति का गठन 16 मई को हुआ।