बाबतपुर एयरपोर्ट के वेटिंग हॉल का मंजर शुक्रवार को उस वक्त पुरकशिश हो गया, जब वहां जुमे की नमाज अदा की गई। एक सफ में खड़े हजयात्रियों ने एक साथ सजदे में सिर झुकाया और दुआ के लिए हाथ उठाए। सभी ने यहां बारगाहे इलाही में ऊपरवाले को शुक्रिया अदा किया कि उन्हें हज का मुबारक मौका मिला। पूर्वांचल हज सेवा समिति के सदर मौलाना रियाज कादरी ने नमाज अदा कराई। नमाज से पहले उन्होंने तकरीर की। दूसरे दिन भी तीन सौ हजयात्रियों के जत्थे ने मदीने के लिए उड़ान भरी।
हजयात्रा के दूसरे दिन रवाना होने वाले जत्थे में वाराणसी 51 जाइरीन शामिल थे। इसके अलावा 12 अन्य जिलों के हजयात्री शामिल थे। सुबह नौ बजे से सांस्कृतिक संकुल स्थित अस्थायी हज हाउस से एयरपोर्ट के लिए हजयात्रियों की रवानगी का सिलसिला शुरू हुआ। दूसरे जत्थे में कई आलिम और मौलाना शामिल रहे।
कच्चीबाग के मौलाना महमूदुल हसन के साथ खजूरी मस्जिद के इमाम मौलाना कमालुद्दीन, रजा कॉलोनी मस्जिद के मुतवल्ली अबरार अहमद, बजरडीहा के मौलाना गुलाम मुस्तफा खान और जौनपुर के मौलाना हामिद सफरे हज पर रवाना हुए। इस क्रम में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी तुफैल अहमद अंसारी अपनी बेटी सलमा आफरीन के साथ हज पर गए। इसी तरह, आजमगढ़ के 24 साल के अकबर अली अपने दादा मुफीद अहमद को काबा का दीदार कराने हज पर ले गए। वहीं जौनपुर के अजमत (24) अपनी बुआ शहनाज बेगम के मेहरम बनकर उनके साथ हज पर गए। हालांकि शुक्रवार को भी फ्लाइट डेढ़ घंटे लेट रही। दोपहर ढाई बजे की फ्लाइट शाम चार बजकर सात मिनट पर रवाना हुई।