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मऊः शहीद को श्रद्घांजलि देने को उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से अंतिम विदाई

Wed, 14 Mar 2018 09:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मऊ
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देर शाम को दरवाजे पर पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला
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नक्सली हमले में सीआरपीएफ के जवान धर्मेंद्र के शहीद होने से मऊ जिले के भेड़ियाधर गांव का शहीदों की धरती में दर्ज हो गया। शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार की देर शाम साढ़े छह बजे के करीब गांव पहुंचा। यहां हजारों की भीड़ उन्हें श्रद्घांजलि देने के लिए उमड़ पड़ी।
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यह भीड़ दोपहर से ही शहीद के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रही थी। शहीद को उसके परिवार के लोगों के साथ अन्य ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस दौरान लगाए गए नारे से पूरा गांव गूंज उठा। शहीद के घर जाने के लिए सकरा रास्ता होने के कारण करीब पांच सौ मीटर पहले ही शव को वाहन से उतार कर सीआरपीएफ के जवान कंधों पर रखकर दरवाजे पर पहुंचे।

घर के सामने रखी गई चौकी पर ताबूत को रख जवानों ने ढक्कन खोले ही थे कि परिवार के लोग शहीद के शव से लिपट कर रोने लगे। इस दौरान पूरा वातावरण गमगीन हो गया था। वहां मौजूद भीड़ के आंखें बरबस की नम हो गई।
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चीख पुकार के बीच परिवार के सदस्यों ने शहीद को श्रद्घाजंलि अर्पित किया। इस दौरान रो रही शहीद की विधवा उमा देवी मां प्रभावती तथा अन्य परिवारीजन को लोगों ने सांत्वना देकर शांत कराने का प्रयास किया।

प्रभारी मंत्री नंद गोपाल नंदी, विधायक श्रीराम सोनकर, पूर्व सपा विधायक बैजनाथ पासवान, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, सपा जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव, पूर्व एमएलसी कमला यादव, डीआईजी सीआरपीएफ डीके त्रिपाठी सहित अन्य ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्घाजंलि अर्पित किया। इस दौरान शहीद के अंतिम दर्शन पाने के लिए उमड़ी भीड़ ने भी अंतिम दर्शन किया।
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शहीदों के परिवार की भरण पोषण करे सरकार

नारों से गूंजा भेड़ियाधर गांव - फोटो : अमर उजाला
नक्सली हमले में शहीद हुए धर्मेंद्र का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव के पास पहुंचा उमड़ा जनसैलाब नारा लगाना शुरू कर दिया। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेंगा, धर्मेंद्र तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय, भारत माता की जय, धर्मेंद्र यादव अमर रहे.. आदि नारे अंतिम क्षण तक लगते रहे।

आठ वर्षीय पुत्री संध्या ने कहा कि उसे शहीद की पुत्री होने का गर्व रहेगा।  बोली, वह अपने पापा के सपनों को जरूर साकार करेगी। संध्या ने कहा कि पापा लगभग हर रोज फोन करके उससे तथा मम्मी सहित भाई से बात करते थे।

इस दौरान वह एक बात हमेशा बोलते थे कि बेटा हम तो तुम लोगों के लिए जंगल में रहते है, अब तुम लोगों को पढ़कर बड़ा आदमी बनना है। संध्या के अनुसार उसके पिता का सपना था कि वह डाक्टर बने, लेकिन यह शब्द बालते बोलते वह रोने लगी।

बोली, पापा के सपनों को उसे साकार करना है, लेकिन पापा तो शहीद हो गए, फिर भी पापा के सपनों को साकार करुंगी। शहीद की पत्नी उमा देवी ने  मंत्री नंद गोपाल नंदी से कहा कि देश में जितने शहीद हो रहे है, सरकार उनके परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी ले, साथ ही इस तरह की घटना को अंजाम देनें वालों को का सफाया करें। यही मेरी इच्छा है।
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