नवरात्र में नौ दिनों तक माता की आराधना व पूजा करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है। देवी भागवत के अनुसार प्रथम दिन मां शैलपुत्री के दर्शन का विधान है और काशी में मुख निर्मालिका गौरी का। मां गीतांबा तीर्थ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन तीन साल की कन्या की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर उसे पूरी तरह से संतुष्टï कर विदा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रात:काल स्नान कर पवित्र होकर कलश स्थापना कर मां की पूजा करें। हो सके तो दुर्गासप्तशती का पाठ कर मां की कपूर से भव्य आरती करें। साथ ही मनोकामना पूर्ति के लिए ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्चै की एक माला का जप अवश्य करें। मां सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगी।
काशी की गलियों में स्थापित हैं मां गौरी के नौ मंदिरों
वासंतिक नवरात्र पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का दर्शन-पूजन होता है। वहीं काशी में नौ गौरी के दर्शन-पूजन का विधान है। कोरोना संक्रमण के कारण पाबंदियों के साथ भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
नौ गौरी के मंदिर
मुख निर्मालिका गौरी
ज्येष्ठा गौरी
सौभाग्य गौरी
श्रृंगार गौरी
-विशालाक्षी गौरी
-ललिता गौरी
भवानी गौरी
मंगला गौरी
सिद्ध महालक्ष्मी गौरी
कैसे करें कलश स्थापना व पूजन
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठï अभिजीत मुहुर्त 13 अप्रैल को सुबह 10:17 बजे तक है। कलश स्थापना केलिए कलश लोहे या स्टील का नहीं होना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पं. राहुल तिवारी के अनुसार कलश स्थापना के लिए पवित्र मिट्टी से वेदी का निर्माण करें। फि र उसमें जौ और गेहूं बोएं तथा उस पर यथाशक्ति मिट्टी, ताँबे या सोने का कलश स्थापित करें। यदि विधिवत करना हो तो गणेशाम्बिका, वरुण, षोडशमातृका, सप्तघृत मातृका, नवग्रह आदि देवों का पूजन तथा पुण्याहवाचन ब्राह्मण द्वारा कराएं अथवा स्वयं करें। इसके बाद उसका षोडशोपचार पूजन करें। तदनन्तर श्रीदुर्गासप्तशती का संपुट अथवा साधारण पाठ भी करने की विधि है। पाठ की पूर्णाहुति के दिन दशांश हवन अथवा दशांश पाठ करना चाहिए।
कन्या पूजन
कुमारी पूजन नवरात्रि व्रत का अनिवार्य अंग है। कुमारिकाएं जगदजननी जगदंबा का प्रत्यक्ष विग्रह हैं। सामथ्र्य हो तो नौ दिन तक, अन्यथा सात, पांच, तीन या एक कन्या को देवी मानकर पूजा करके भोजन कराना चाहिए।
नवदुर्गा को करें अर्पित
प्रतिपदा- उड़द, हल्दी, माला-फूल
द्वितीया-तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल शहद
तृतीया-लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल
चतुर्थ- दही, फल, सिंदूर, मसूर
पंचमी-दूध, मेवा, कमलपुष्प, बिंदी
षष्ठïी-चुनरी, पताका, दूर्वा
सप्तमी-बताशा, इत्र, फल-पुष्प
अष्टïमी-पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र
नवमी-खीर, सुहाग सामग्री, साबुदाना, अक्षत फल, बताशा
दुर्गासप्तशती के पाठ का फल
दुर्गासप्तशती के एक पाठ से फलसिद्धि, तीन पाठ से उपद्रव शांति, पांच पाठ से सर्वशांति, सात पाठ से भय मुक्ति, नौ पाठ से यज्ञ केसमान फल, 11 पाठ से राज्य की प्राप्ति, बारह पाठ से कार्यसिद्धि, चौदह पाठ से वशीकरण, पंद्रह पाठ से सुख-संपत्ति, सोलह पाठ से धन व पुत्र की प्राप्ति, सत्रह पाठ से राजभय व शत्रु रोग से मुक्ति, 20 पाठ से ग्रहदोष शांति और पच्चीस पाठ से बंधन मुक्ति।
चैत्र नवरात्रि की तैयारी शुरू देवी मंदिरों की सफाई में लगा अमला
चैत्र नवरात्र शुरू होने के पहले देवी मंदिरों की साफ सफाई करने में नगर निगम के कर्मचारी लग गए हैं। मंदिरों के बाहर बैरिकेडिंग हो रही है। गर्भगृह से लेकर मंदिर परिक्षेत्र की धुलाई , रंगाई-पुताई जोरों से चल रही हैं। मंदिर में होने वाले भीड़भाड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर की सफाई के साथ ही मंदिर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई। भदैनी स्थित नौ दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, कमच्छा स्थित कामाख्या देवी और दुर्गाकुंड बड़ी शीतला मंदिर की भी साफ-सफाई की जा रही है। नवरात्र में सोशल डिस्टेंसिग के तहत मन्दिर में भक्तों को प्रवेश मिलेगा।