बाबा विश्वनाथ और माता गौरा।
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4 साल की जद्दोजहद के बाद सितंबर 2023 में एक करोड़ 54 लाख में भवन स्वामी ने डॉ. कुलपति तिवारी को यह भवन रजिस्ट्री की। शिवांजलि के संयोजक संजीवरत्न मिश्र ने बताया कि महंत आवास धराशायी होने के बाद रजत सिंहासन क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके कारण पहली बार बाबा का तिलकोत्सव कुश से बनाए गए सिंहासन पर करना पड़ा था।
इस बाबत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने कहा कि पुश्तैनी निवास धराशायी होने के बाद गौरा की बरात पहली बार किराये के जिस भवन से निकली थी अब वह गौरा का अपना भवन हो गया है।
कुछ जानकारियां
- 360 साल से काशी में मां गौरा के गौने का आयोजन होता है।
- भवन के 75 फीसदी हिस्से में होता है देवकार्य
- ग्राउंड फ्लोर पर चल रजत सिंहासन प्रतिमा का स्थान
- दूसरे फ्लोर पर रहता है महंत परिवार
- तीसरे तल पर बाबा की रजत प्रतिमाओं के दैनिक पूजन का होता है कार्यक्रम
- 1170 स्क्वायर फीट में है निर्मित मकान