वर्ष में एक बार होने वाले अन्नपूर्णा मां के स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन पूजन के लिए लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचे। मां के दर्शन पूजन के बाद उनका खजाना पाने के लिए रविवार की रात्रि में आठ बजे से ही लोगों की कतार लग गई थी। जो आठ घंटे बाद भोर में चार बजे मां का दर्शन पूजन कर खजाना पा सके। इसके लिए करीब चार किमी लंबी कतार लगी हुई थी।
विश्वनाथ मंदिर के रेड जोन में स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के स्वर्णमयी प्रतिमा साल में एक बार धनतेरस पर चार दिनों के लिए खुलती है। इस प्रतिमा के दर्शन पूजन के लिए न केवल काशी वासी बल्कि देश के कोने कोने से लोग पहुंचते हैं।
इस दौरान मां के खजाना भी भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस आशीर्वाद पाने के लिए भक्त रात में ही लंबी कतारों में लग गए थे। सोमवार की भोर में सर्वप्रथम मंदिर के पंडित सत्यनारायण पांडेय और उनके सुपुत्र ने माता का पूजन प्रारम्भ किया मंदिर के महंत रामेश्वर पूरी महाराज ने भव्य आरती की।
मंदिर महंत ने बताया कि स्वयं बाबा भोलेनाथ भिक्षा मांगने आए थे, उसी समय ही मां ने वरदान दिया था की कोई भी काशी नगरी में भूखा नहीं सोयेगा। तब से यह परंपरा चली आ रही है। इस दर्शन के लिए एक कतार गोदौलिया से ढेढ़सी के पुल तक जा पहुंचा था, दूसरी कतार चौक थाने के समीप थी।
जैसे जैसे समय नजदीक आ रहा था भक्तों ने कहा कि बाबा बाबा सब कहे माई कहे न कोई, बाबा के दरबार में माई कहे सो होय का जयकारा लगाना शुरू हो गया। वहां बोलो सच्चे दरबार की जय के नारे गूंजते रहे। इस दौरान दर्शन करने राज्य मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी रहे।