ज्ञानवापी परिसर के बंद तहखानों (तलगृह) के एएसआई से वैज्ञानिक सर्वे की मांग के मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति दाखिल की है। मसाजिद कमेटी ने अदालत में कहा कि हिंदू पक्ष हमें बेदखल करना चाहता है । यही कारण है कि एक के बाद एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा रहा है। दावे झूठे और कपोल कल्पित हैं। इस मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी।
शृंगार गौरी के नियमित दर्शन मामले का वाद राखी सिंह ने दाखिल किया है। उन्होंने जिला जज की अदालत में आवेदन देकर कहा है कि ज्ञानवापी परिसर से बैरिकेडिंग हटाई जाए। उन्होंने सिविल प्रक्रिया संहिता के आर्डर 39, नियम-1 व 2 का हवाला देकर मांग की है कि प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त को बैरिकेडिंग हटाकर पूजा की व्यवस्था का तत्काल आदेश दिया जाए।
उनका कहना है कि वर्ष 1993 में जिला प्रशासन द्वारा बिना न्यायिक व प्रशासनिक आदेश के बैरिकेडिंग लगाकर पूजा से रोक दिया गया था। हालांकि वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन हर वर्ष पूजा की अनुमति दी जाती रही है। मगर, इससे मां शृंगार गौरी, गणेश जी, नंदी जी और हनुमानजी के नियमित दर्शन नहीं हो पा रहे हैं।
दृश्य अदृश्य देवी-देवताओं के दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। सभी बंद तहखानों के दरवाजों के अवरोध हटाए जाएं। मलबा साफ कराकर जीपीआर व अन्य आधुनिक तकनीक से एएसआई से सर्वे कराया जाए।