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11 शुभ मुहूर्त से वैवाहिक लग्न कारोबार में छाई है रौनक

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वाराणसी। कोरोना काल के दौरान विरान पड़े वैवाहिक उद्योग में रौनक छाई हुई है। इस सीजन में मात्र 11 शुभ मुर्हूत ही रहे, लेकिन कारोबारियों की स्थिति थोड़ी जरूर सुधर गई। इन चुनिंदा शुभ मुर्हूतों ने लाकडाउन और कोरोना के
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शुरुआती दिनों में बेजार पड़े लान, होटल और अन्य वैवाहिक कारोबारियों में जान भर दी। इनकी माली हालत में थोड़ी सुधार आ गया। कारोबारियों के अनुसार कोरोना से बचाव के साथ शादी समारोह व मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन हो रहे
हैं। शहरभर के लान, होटल व लॉज की ठप पड़ी आमदनी शुरू हो गई। इससे उनके रखरखाव की चिंता अब नहीं रह गई है।
शहर भर में लगभग 1500 से अधिक छोटे-बड़े होटल, गेस्ट हाउस, लॉन, और करीब 400 से अधिक वैवाहिक लान हैं। इनसे करीब 15 हजार से अधिक परिवारों की जीविका चल रही है। टेंट, कैटरिंग, फूल सजावट, विद्युत सजावट, रोड लाइट आदि की व्यवस्थाएं होटल व लॉज से हो रही हैं। इसके अलावा बैंड बाजा, डीजे, कार्ड छपाई, आतिशबाजी, ब्यूटी पार्लर, रेडिमेड कपड़े, बनारसी साड़ी, लहंगा, ट्रेवेल्स, किराना कारोबारियों को लग्न मिलने से उनकी स्थिति थोड़ी सुधर गई है। कारोबारियों के अनुसार, कम बजट की शादियां इस कोरोना काल में अधिक हुई हैं। पहले जो शादी 10 लाख मेें होती थी, इस साल 5 लाख में हो रही है। कोरोना के चलते गर्मी वैवाहिक लग्न एकदम बेरंग रहा। 10 से 20 लोगों ने ही
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मिलकर शादियां की। वहीं अधिकतर गर्मी की शादियां रद्द हो गई थी। यह शादियां अब दिसंबर के इस लग्न में हो रही हैं।
25 नवंबर से शुरू हुए शादी विवाह, मांगलिक कार्य के मुहूर्त 11 दिसंबर तक ही है। ऐसे में लान और होटलों में बुकिंग तेज है। इस कोरोना काल में छोटे बजट की शादियां हो रही हैं। मेहमानों को कोरोना प्रोटोकाल के तहत लॉन के अंदर प्रवेश कराया जा रहा है। -अंशुल गुप्ता, लॉन संचालक
इस सीजन में मुर्हूत कम होने के चलते शादियां का दबाव अधिक है। सभी लॉन, होटल बुक हैं। एक फायदा यह हुआ कि बेजार पड़े वैवाहिक कारोबार को इस लग्न से काफी राहत मिल गई। इसे उद्योग से जुड़े कारोबारी थोड़ी राहत में हैं।-गौतम भार्गव, टेंट संचालक
शादियों का लग्र तेज होने के चलते ट्रवेल्स कारोबार रफ्तार पकड़ लिया। लग्न मिलने से मालिकों को गाड़ियों की किश्त की टेंशन थोड़ा कम हो गई। उधर, लॉकडाउन भर गाड़ियों के पहिए हिले नहीं थे। -राकेश सिंह, ट्रवेल्स संचालक
इस लग्न के चलते कैटरिंग के धंधे से जुड़ कारोबारियों को यह राहत मिल गई कि उनके सामानों का रखरखाव और गोदामा का किराया भाड़ा निकल गया। क्योंकि गर्मी के सीजन में एक भी बुकिंग नहीं मिली थी। -शरद श्रीवास्तव, कैटरिंग कारोबारी
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