रामकटोरा निवासी माधुरी श्रीवास्तव की दो बेटियां शिप्रा और श्वेता ने पिता के नक्शे कदम पर चल चिकित्सा के क्षेत्र को अपने कॅरियर के रूप में चुना। 2008 में जब शिप्रा व श्वेता के पिता का निधन हुआ तो, लोगों के सामने ये सवाल था कि उनको मुखाग्नि कौन देगा। लेकिन बेटियों ने समाज में बेटों के मुखाग्नि करने की परंपरा को बदलते हुए खुद अपने पिता को मुखाग्नि दी।
माता-पिता के मेहनत को किया साकार
कबीरनगर निवासी जगदीश नारायण तिवारी और इंदु प्रभा के पुत्र ब्रजेश तिवारी जेएनयू में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वहीं बहन डॉ. प्रज्ञा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में राजभाषा अधिकारी है। इन दोनों के सफलता का मूल मंत्र है कि अगर आपमें दृढ़ इच्छा शक्ति है और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार हो तो कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आएगी।