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विश्व सिबलिंग डे पर विशेष: विभिन्न क्षेत्रों में काम करके काशी के कई सिबलिंग रोशन कर रहे अपना नाम

Sun, 10 Apr 2022 02:50 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

हर साल 10 अप्रैल को राष्ट्रीय सिबलिंग्स डे मनाया जाता है। शहर में ऐसे कई सिबलिंग्स है, जो न सिर्फ खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने मुकाम हासिल किया है।
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प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और प्रो. विजयनाथ मिश्र, शिप्रा और श्वेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाई-बहन, बहन-बहन, भाई-भाई (यानी सिबलिंग्स) के रिश्ते में भले ही नोकझोंक और तकरार होती है, लेकिन उनका रिश्ता सबसे प्यारा होता है। सिबलिंग्स के बिना जीवन वाकई काफी अधूरा होता है। इसी रिश्ते के नाम हर साल 10 अप्रैल को राष्ट्रीय सिबलिंग्स डे मनाया जाता है। वाराणसी में ऐसे कई सिबलिंग्स है, जो न सिर्फ खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने मुकाम हासिल किया है।

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खेलों में नाम कर रहे काशी के तीन भाई
शिवपुर के रहने वाले तीन भाई अमित, सुमित और सुजीत अपने खेलों के जरिये न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर काशी का मान बढ़ा रहे है। इन तीन भाईयों में खास बात यह है कि इन तीनों ने एक ही हॉकी स्टिक से अभ्यास कर आज भारतीय हॉकी टीम में अपना स्थान बनाया है।
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शिक्षा के साथ कला क्षेत्र में कमा रहे नाम
आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और आईएमएस बीएचयू में प्रो. विजयनाथ मिश्र सगे भाई हैं। दोनों भाई शिक्षा के साथ-साथ कला के जरिये भी काशी का मान बढ़ा रहे हैं। प्रो. विश्वंभर नाथ अध्यापन के साथ ही गंगा संरक्षण, कला और संगीत के जरिए भी काशी का मान बढ़ा चुके हैं। छोटे भाई प्रो. विजय नाथ मिश्र आईएमएस बीएचयू में मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं।

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समाज की सोच को तोड़ बदली परंपरा

रामकटोरा निवासी माधुरी श्रीवास्तव की दो बेटियां शिप्रा और श्वेता ने पिता के नक्शे कदम पर चल चिकित्सा के क्षेत्र को अपने कॅरियर के रूप में चुना। 2008 में जब शिप्रा व श्वेता के पिता का निधन हुआ तो, लोगों के सामने ये सवाल था कि उनको मुखाग्नि कौन देगा। लेकिन बेटियों ने समाज में बेटों के मुखाग्नि करने की परंपरा को बदलते हुए खुद अपने पिता को मुखाग्नि दी।


माता-पिता के मेहनत को किया साकार
कबीरनगर निवासी जगदीश नारायण तिवारी और इंदु प्रभा के पुत्र ब्रजेश तिवारी जेएनयू में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वहीं बहन डॉ. प्रज्ञा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में राजभाषा अधिकारी है। इन दोनों के सफलता का मूल मंत्र है कि अगर आपमें दृढ़ इच्छा शक्ति है और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार हो तो कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आएगी।
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