घायल पिता और उसकी बच्ची।
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कुछ लोगों ने सुरेंद्र उर्फ लल्ला सेठ(31) को इसकी जानकारी दी। अभी लल्ला कुछ समझता, उसी वक्त तेज आवाज के साथ सिलिंडर ब्लास्ट हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि लल्ला सेठ उछल कर दस फीट दूर जा गिरा। शाम के समय बाजार में निकले कई राहगीर चपेट में आ गए।
गुब्बारा विक्रेता लल्ला सेठ और चौबेपुर स्थित मायके से भाई को राखी बांधकर कुंडा गांव स्थित घर जाने के लिए ऑटो के इंतजार में खड़ी गीता देवी(40) की मौके पर ही मौत हो गई। धमाका इतना तेज था कि एक किलोमीटर दूर का इलाका दहल गया। विस्फोट में राहगीर बबलू(35) का दाहिना पैर उड़ गया।
वहीं सब्जी लेने के लिए पिता आसिफ उर्फ कल्लू(35) के साथ पैदल बाजार निकली आलिया(5) घायल हो गई। पिता-पुत्री के पैर बुरी तरह जख्मी हो गए। कुंडा निवासी नवीन(20) को कंधे पर चोटें आईं। धमाका सुनते ही गांव में दहशत मच गई। गांव के लोग आनन-फानन खून से लथपथ घायलों को ऑटो में लेकर तुरंत बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर भागे।
सूचना पाकर रामनगर थाने और मुगलसराय कोतवाली पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। ट्रामा सेंटर में डीसीपी काशी जोन अमित कुमार ने घायलों के परिजनों से बातचीत करते हुए जानकारी ली। वहीं पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने विस्फोट मामले की जांच शुरू करा दी है। संभवत: गैस लीकेज होने से यह हादसा हुआ।
इन लोगों को आई हल्की चोटें
बहादुरपुर के रहने वाले रेहान(8), मढ़िया निवासी जय प्रकाश(35), संदीप(14) और कुंडा निवासी गौतम(18) का प्राथमिक उपचार पड़ाव स्थित निजी चिकित्सालय में कराने के बाद छोड़ दिया गया।
पहले भी कई बार गुब्बारा में हवा भरने वाली सिलिंडर की टंकी फट चुकी है। 24 दिसंबर 2018 को जैतपुरा थाना अंतर्गत नक्खीघाट पुल के पास सिराजुद्दीन के मकान में गुब्बारे में गैस भरते समय सिलिंडर ब्लास्ट होने से आठ लोग जख्मी हुए थे। इसमें अमरजीत के दोनों पैर व बायां हाथ उड़ गया था। सिलिंडर टंकी फटने से घायल आठ सदस्यों को ठीक होने में साल भर लग गए थे। सूजाबाद की घटना ने नक्खीघाट हादसे की याद ताजा कर दी।
यही नहीं, अक्तूबर 2018 में रामनगर के रामलीला के दौरान गुब्बारा में गैस भरने के दौरान हुए विस्फोट में बजरडीहा निवासी बाबू घायल हो गया था। इस तरह के हादसे कई बार हो चुके है, लेकिन जिम्मेदार अब तक बेखर ही रहे हैं। पुलिस व प्रशासिनक महकमे की अनदेखी की वजह से खतरों का खेल धड़ल्ले से जारी है।
बीएचयू में रसायन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार ने कहा गुब्बारा भरने वाले सिलिंडर में हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल होता है। यह डीजल, पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील होता है। इससे होने वाली घटना में ज्यादा नुकसान होने की संभावना रहती है। हाइड्रोजन जो है वह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से हल्की होती है, इसलिए गुब्बारा भी उड़ने लगता है। कभी कभी गर्म हवा भी गुब्बारा में भरते हैं, जिसकी गर्मी से वहां की हवा हल्की हो जाती है।