शत्रु संपत्तियों को बेचने की तैयारी में गृह मंत्रालय
जानकारों के अनुसार गृह मंत्रालय देशभर में 12611 हजार शत्रु संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रहा है। नियम के अनुसार किसी भी शत्रु संपत्ति को बेचने से पहले डीएम या कमिश्नर की मदद से बेदखली की प्रक्रिया होगी। इसके बाद उसे नीलामी के जरिये बेचा जा सकेगा। इस पर अंतिम निर्णय गृह मंत्रालय का होगा।
शत्रु संपत्ति में कोई किरायेदार तो कोई कब्जेदार
शत्रु संपत्तियों में रहने वाले कोई किरायेदार तो कोई कब्जेदार है। इनमें रहने वालों के अनुसार ये उनके पूर्वजों की संपत्ति है। इस बारे में अपना पक्ष प्रशासन को दिया गया है। जैसा शासन और प्रशासन का निर्णय होगा। उसके अनुसार ही आगे का कार्य किया जाएगा।
क्या है शत्रु संपत्ति
आजादी के बाद जो लोग भारत से पाकिस्तान जाकर बस गए उनकी संपत्तियों को भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित किया है। इस संबंध में आदेश 10 सितंबर 1959 में जारी किया गया था। देश भर में ऐसी सभी 12611 संपत्तियां शत्रु संपत्ति हैं।
कस्टोडियन के माध्यम से देश के कई राज्यों में फैली शत्रु संपत्तियां केंद्र सरकार के कब्जे में हैं। इसके अलावा 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों के मद्देनजर, भारत से लोगों का पाकिस्तान में प्रवास हुआ था। भारत की रक्षा अधिनियम, 1962 के तहत बनाए गए नियमों के तहत, सरकार ने पाकिस्तानी राष्ट्रीयता लेने वालों की संपत्तियों और कंपनियों को अपने कब्जे में ले लिया था।
लोकसभा में बताया गया था कि पाकिस्तानी नागरिकों की ओर से कुल 12485 संपत्ति और चीनी नागरिकों की ओर से 126 संपत्तियों को छोड़ दिया गया था जिसका कुल मूल्य लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है।