कानपुर में शहीद सीओ से कभी बनारस में खौफ खाते थे बदमाश
कानपुर में बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद हुए डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र कैंट वाराणसी के जीआरपी थाना कैंट के प्रभारी निरीक्षक रह चुके हैं। वर्ष 2013 में कैंट जीआरपी निरीक्षक रहे देवेंद्र कुमार मिश्र को रेलवे में अपराध नियंत्रण में बहुत सफलता मिली थी। जहरखुरान गिरोह और यात्रियों के सामान चुराने वाले गिरोहों के बदमाश उनसे खौफ खाते थे।
1990 बैच के दरोगा देवेंद्र 2016 में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर डिप्टी एसपी बने थे। उनकी पहली पोस्टिंग गाजियाबाद के मोदीनगर में हुई थी। देवेंद्र मिश्रा के अच्छे दोस्तों में से एक पिंडरा क्षेत्राधिकारी अनिल राय ने बताया कि हृदय विदारक घटना की अलसुबह जानकारी मिलते ही बहुत दुःख हुआ।
बांदा जिले के गिरवा थाना के निवासी देवेंद्र भाई की कार्यशैली गजब की थी। अपराध नियंत्रण और अपने मातहतों का ख्याल रखना और निजी सबंधों का निर्वहन करना उन्हें बहुत अच्छे से आता था। वह किसी भी टास्क को लेकर कभी बैकफुट पर नहीं दिखते थे। यही कारण है कि वह पुलिस महकमे में काफी लोकप्रिय भी रहे।
पूर्वांचल में 2012 में मऊ में दो बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे कोतवाल गोविंद सिंह
कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की शहादत का समाचार वाराणसी के पुलिसकर्मियों ने सुना तो स्तब्ध रह गए। पुलिसकर्मियों का कहना था कि किसी बदमाश को पकड़ने गई पुलिस टीम पर इस तरह का हमला कभी नहीं हुआ था।
वहीं, दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं और पुलिस कर्मियों में चर्चा थी कि 2010 से पहले जब पूर्वांचल के तीन जिलों में नक्सली सक्रिय थे तो 20 नवंबर 2004 को चंदौली जिले के नौगढ़ क्षेत्र में हिनौत गांव में लैंड माइन विस्फोट किया गया था। इस नक्सली हमले में पुलिस और पीएसी के 18 जवान शहीद हो गए थे। इसी तरह से मिर्जापुर के अहरौरा क्षेत्र के खोराडीह में 22 नवंबर 2001 को नक्सलियों ने हमला कर भारी मात्रा में असलहा और कारतूस लूट लिया था।
वहीं, पुलिस और बदमाशों की आमने-सामने की मुठभेड़ की बात की जाए तो पूर्वांचल में आखिरी बार 18 अप्रैल 2012 को मऊ जिले के अवस्था इब्राहिम उर्फ मठिया गांव में कोतवाल गोविंद सिंह शहीद हुए थे। इस दौरान दो बदमाश मारे गए थे। इसके पहले मार्च 2001 में मिर्जापुर जिले में लालगंज क्षेत्र की रजवाहा पुलिया के समीप बदमाशों से मुठभेड़ में वाराणसी के जैतपुरा थानाध्यक्ष अजय सिंह शहीद हो गए थे, जबकि तत्कालीन सारनाथ थानाध्यक्ष केपी सिंह और पहड़िया चौकी इंचार्ज रतन सिंह यादव घायल हो गए थे।
वहीं, भीड़ के हमले की बात की जाए तो 29 दिसंबर 2018 को गाजीपुर जिले में जाम लगाए लोगों ने करीमुद्दीनपुर थाने के दीवान सुरेश प्रताप वत्स को पीट-पीट कर मार डाला था। इसके अलावा आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश देने गई पुलिस टीम पर जिले के जंसा थाना के हरसोस, फूलपुर क्षेत्र, रोहनिया क्षेत्र, लोहता क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में कई बार पथराव और हमले की घटनाएं हो चुकी हैं।