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कानपुर की तरह ही पूर्वांचल में भी हैं कई 'विकास', शिकंजा नहीं कस रही पुलिस

Sat, 04 Jul 2020 01:40 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

  • राजनीतिक संरक्षण और पुलिस की मिलीभगत से कुख्यात वर्षों से कानून व्यवस्था के लिए बने हैं चुनौती 
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उत्तर प्रदेश पुलिस। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में बृहस्पतिवार देर रात 60 मुकदमों के आरोपी इनामी बदमाश विकास दुबे के ठिकाने पर पुलिस ने दबिश दी तो हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी गई। शुक्रवार को लोगों में यही चर्चा का विषय रही कि राजनीतिक संरक्षण और पुलिस की मिलीभगत से पूर्वांचल में भी ऐसे कई 'विकास' हैं, जिन पर पुलिस का वश नहीं चल पा रहा है। 

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सभी का एक ही सवाल था कि आखिरकार अपराधियों को इतना संरक्षण क्यों मिलता है कि आठ पुलिसकर्मियों की जान पर भारी पड़ जाए। बनारस में 30 सितंबर 2019 को सदर तहसील में दिनदहाड़े बस संचालक की हत्या की गई। शूटर चिह्नित करने में आठ महीने लग गए। नौ महीने बीत गए, मगर चिह्नित 50 हजार का इनामी बदमाश गिरधारी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। गिरधारी पर गंभीर आपराधिक आरोपों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। 

वहीं, एमएलसी बृजेश सिंह से अदावत के लिए चर्चित एक लाख का इनामी बदमाश इंद्रदेव सिंह सात-आठ साल से पुलिस के लिए चुनौती बना है। एक लाख का इनामी बदमाश दीपक वर्मा भी कई सालों से पुलिस से लुकाछिपी खेल रहा है। 

दो लाख के इनामी बदमाश अताउर रहमान उर्फ बाबू उर्फ सिकंदर व सहाबुद्दीन, विश्वास नेपाली, मनीष सिंह जैसे 15 से ज्यादा ऐसे कुख्यात बदमाश हैं, जिन पर वर्षों से पुरस्कार घोषित है, लेकिन जिले की पुलिस, क्राइम ब्रांच या एसटीएफ को यह भी नहीं पता है कि वह जिंदा हैं या नहीं।
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कुछ पर कसा शिकंजा, कुछ आरोपों से मुक्त 
पूर्वांचल में लगभग तीन दशक से ज्यादा समय से एमएलसी बृजेश सिंह और विधायक मुख्तार अंसारी का गिरोह सुर्खियों में है। दोनों गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण और पुलिस की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं। हालांकि, एमएलसी बृजेश के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या अब कम रह गई है और ज्यादातर मामलों में वह बरी हो चुके हैं। 

साथ ही बृजेश या उनके गिरोह का नाम भी हाल के वर्षों में किसी वारदात में सामने नहीं आया है। वहीं, मुख्तार और उनके गिरोह से जुड़े लोगों पर शिकंजा कसता जा रहा है। पूर्व एमएलसी विनीत सिंह का नाम भी सुर्खियों में रहा करता था, लेकिन अब नहीं। पूर्व सांसद धनंजय सिंह बीते महीने ही एक आपराधिक मामले में जेल भेजे गए थे। ऐसा ही हाल आजमगढ़ और भदोही का भी है।
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