मनोज सिन्हा का राजनीतिक सफर:
गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद तहसील के मोहनपुरा गांव के साधारण परिवार में जन्में मनोज सिन्हा ने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की। बीएचयू के छात्रसंघ अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय मंत्री तक पहुंचने का सफर काफी कष्टदायक रहा। उन्हें कई बार हार-जीत के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
पिछले लोक सभा चुनाव में हारने के बाद से मनोज सिन्हा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल बनने के बाद सब पर विराम लग चुका है। घर के चंद कदम दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय से उनकी पढ़ाई शुरू हुई और गांव में ही इंटर तक की पढ़ाई पूरी की।
मनोज सिन्हा ने गणित और विज्ञान के विषयों में उत्कृष्ट प्रर्दशन के आधार पर जिले के राजकीय सिटी इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट (विज्ञान वर्ग) में दाखिला लिया। मनोज सिन्हा के स्कूली दिनों के कई साथी बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते है कि, ''सिटी इंटर कॉलेज में आईएससी के पहले वर्ष में ही विश्व हिन्दू परिषद(वीएचपी) के संपर्क में आए और उसके कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे।" स्कूली दिनों में वीएचपी के संपर्क में आने के बाद मनोज सिन्हा के दिलों दिमाग में राजनीतिक महत्वकांक्षा ने घर कर लिया।
इंटरमीडिएट की परीक्षा उन्होंने फर्स्ट क्लास पास की और घरवालों का सपना पूरा करने बीटेक की पढ़ाई के लिए वह बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पहुंच गए। यहां से उन्होंने छात्र राजनीत में अपना कदम रखा। आगे चलकर वह बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए।