बीएचयू में स्मारक डाक टिकट जारी करते समय दिए मंत्री के बयान पर बखेड़ा
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बीएचयू में 28 जून को आयोजित शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट विमोचन कार्यक्रम में रेल और संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने जो बयान दिया था उसे लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है।
कार्यक्रम में साहित्यकार धर्मवीर भारती की पंक्ति इलाहाबाद ये बड़ा हरामजादा शहर है वाले बयान पर बवाल मचने के बाद आखिरकार रेल और संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को झुकना पड़ा।
शुक्रवार को अपने फेसबुक वाल पर सिन्हा ने इस पर माफी मांगते हुए इलाहाबाद शहर को श्रद्धा का केंद्र बताया और विश्वविद्यालय को आक्सफोर्ड का दर्जा दिया है। साथ ही धर्मवीर भारती को साहित्य का अत्यंत तेजस्वी नक्षत्र बताया है।
उन्होंने कहा कि उनके साहित्य को समझना बहुत मुश्किल है। अमर उजाला में 29 जून को प्रकाशित खबर 'बीएचयू-इलाहाबाद विवि को लेकर चले शब्दों के तीर' के बाद बनारस में तो कम इलाहाबाद में बवाल मचा हुआ है।
इसमें मनोज सिन्हा ने साहित्यकार धर्मवीर भारती की उस पंक्ति को कोट किया था, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद को हरामजादा शहर बताया था।
इस बीच गुरुवार को इलाहाबाद में धर्मवीर भारती की पत्नी पुष्पा भारती ने जहां सिन्हा के इस बयान पर आपत्ति जताई थी वहीं यह कहा कि धर्मवीर भारती ने कभी भी इस तरह की बात न कभी कही है और न कहीं लिखी है।
इसके अलावा फेसबुक पर बुद्धजीवियों, साहित्यकारों, छात्रों ने विरोध जताया था। विरोध बढ़ता देख मनोज सिन्हा को आखिरकार माफी मांगनी पड़ी।
रेल और संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का फेसबुक वाल
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दिनांक 28 जून 2017 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में दो स्मारक डाक टिकट काशी हिन्दू विश्वविद्यालय पर जारी किये गये। उस कार्यक्रम में मेरे द्वारा धर्मवीर भारती जी के प्रसंग के उद्धृत करने को लेकर एक गैर जरुरी विवाद पैदा हुआ है।
उसका सन्दर्भ हास-परिहास का था।यह मेरे और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंद्र त्रिपाठी जी के व्यक्तिगत संबंधों में चला आ रहा है। इलाहाबाद शहर हमारे लिए श्रद्धा का केंद्र है जिसे तीर्थराज हम मानते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय जिसे ऑक्सफोर्ड के नाम से देश जानता है, इस विश्वविद्यालय के लिए मेरे मन में अत्यंत सम्मान है।
इलाहाबाद शहर और विश्वविद्यालय के लिए कोई अपमान जनक टिप्पणी करने की बात तो दूर, मैं स्वप्न में भी नहीं सोच सकता हूँ। धर्मवीर भारती जी हिंदी साहित्य के अत्यंत तेजश्वी नक्षत्र रहे हैं और उनके लिए भी मेरे मन में अत्यंत श्रद्धा है।
उनके पूरे साहित्य को समझना मेरे लिए बहुत मुश्किल है क्यूंकि न मैं साहित्य का विद्यार्थी रहा हूँ न ही मेरी उतनी समझ है बावजूद इसके अगर किसी की भावना को आघात लगा है तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरी ऐसी कोई मन्सा नहीं थी बावजूद इसके इलाहाबाद व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रेमियों तथा धर्मवीर भारती जी में आस्था रखने वालों सभी बहनों- भाइयों से मैं खेद प्रकट करता हूं।
मेरा यह भी आग्रह होगा कि हर चीज़ को राजनीति के नजरिये से देखना यह अच्छी परम्परा नहीं है।