Varanasi News: रात भर भजन कीर्तन के बाद 11 मई को मध्याह्न में चक्र पुष्करणी कुंड में स्नान होगा। प्रधान तीर्थ पुरोहित जयेंद्र नाथ दुबे बब्बू महाराज ने बताया कि इस तिथि पर चक्रपुष्करणी कुंड में स्नान करने मात्र से ही व्यक्ति को चारों धाम का फल प्राप्त होता है।
अक्षय तृतीया पर मां मणिकर्णिका गंगा घाट की गलियों में भक्तों को दर्शन देने निकलेंगी। शुक्रवार को मां की प्राचीन प्रतिमा को महंत आवास से चक्रपुष्करिणी कुंड तक पालकी पर लाया जाएगा। रात भर चक्रपुष्करणी कुंड पर विराजमान मां के दर्शन के लिए भक्त उमड़ेंगे। कुंड का जल भी मां के पूजन से ऊर्जित होगा।
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काशी के प्राचीन तीर्थ चक्रपुष्करणी पर अक्षय तृतीया पर रात में मां मणिकर्णिका का वार्षिक शृंगार किया जाएगा। मणिकर्णिका मां की सवारी ब्रह्मनाल स्थित तीर्थ पुरोहित जयेंद्रनाथ दुबे बब्बू महाराज के आवास से निकलेगी। रात में मणिकर्णिका माई की अष्टधातु वाली ढाई फीट ऊंची प्रतिमा तीर्थ कुंड में स्थित 10 फीट ऊंचे पीतल के आसन पर स्थापित की जाएगी। इसके बाद देवी की फूलों औेर नए वस्त्रों से झांकी सजाई जाएगी।
मणिकर्णिका कुंड से ही निकली थी मां की प्रतिमा
मान्यता है कि मणिकर्णी माई की अष्टधातु की प्रतिमा मणिकर्णिका कुंड से निकली थी। यह प्रतिमा वर्षभर ब्रह्मनाल स्थित मंदिर में विराजमान रहती है। सिर्फ अक्षय तृतीया को पालकी पर सवार होकर दर्शन-पूजन के लिए कुंड पर स्थापित की जाती है। देवी की प्रतिमा को कुंड में स्नान कराया जाता है। इसके बाद सवारी निकलकती है। मान्यता है कि मणिकर्णिका माई के स्नान के बाद तीर्थ कुंड का जल अगले एक वर्ष के लिए सिद्ध हो जाता है और इसी जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं के पाप और कष्ट दूर होते हैं।