500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद कई अभिभावक बच्चों की फीस नहीं जमा कर पा रहे हैं। फीस में देरी की वजह से वह स्कूलों की ओर से लगने वाले जुर्माने को लेकर चिंतित हैं। ऐसे हालात के मद्देनजर वाराणसी और पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन ने नकदी संकट को देखते हुए नया फैसला लिया है। नए फैसले के तहत नोटबंदी के बाद बच्चों की फीस जमा करने को लेकर परेशान अभिभावक अब स्कूलों में कैशलेस फीस जमा कर सकेंगे।
अब अभिभावकों को चेक, ड्राफ्ट, पे आर्डर, ऑनलाइन पेमेंट और डेबिट कार्ड आदि से भुगतान की सहूलियत दी गई है। इससे वाराणसी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में करीब सवा लाख परिवारों को राहत मिलेगी। यह भी तय किया गया है कि अक्तूबर और नवंबर माह में फीस जमा करने पर देरी के बावजूद जुर्माना भी नहीं लिया जाएगा।
स्कूलों में स्वाइप मशीन लगाने के लिए बैंकों से मांग की गई है। वाराणसी और पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक महोक ने बताया कि अभिभावकों की समस्या को देखते हुए अक्तूबर-नवंबर की फीस में देरी पर पांच दिसंबर तक पेनॉल्टी न लेने और कैशलेस फीस जमा करने का फैसला लिया गया है।
40 प्रतिशत बच्चों की फीस जमा नहीं
अभी तक विद्यालयों में करीब 40 प्रतिशत बच्चों की फीस जमा नहीं हो सकी है। अभिभावकों के पास नई करेंसी न होना और विद्यालयों में पुराने नोट न लेना इसकी वजह है। बता दें कि सनबीम एकेडमी, इंटरनेशनल हिंदू स्कूल, सेंट मैरी स्कूल, सिल्वर ग्रोव स्कूल सहित आधे से अधिक स्कूलों में फीस कैश जमा होती है। सेंट जांस स्कूल में चेक और कैश दोनों ही तरह से फीस जमा होती है।