यादगार रही राष्ट्रपिता की काशीयात्रा
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गांधी अध्ययन पीठ के निदेशक प्रो. संजय ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की काशीयात्रा हर मायने में यादगार रही। बापू जब भी काशी आए वह दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। बापू की 11वीं काशी यात्रा तो ऐतिहासिक रही। अक्तूबर 1936 में राष्ट्रपिता ने इस यात्रा में अखंड भारत की संकल्पना का प्रतीक भारत माता मंदिर का उद्घाटन किया।
भारत माता से प्रेम करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत
काशी विद्यापीठ के वाणिज्य संकाय के प्रो. अजित कुमार शुक्ला ने बताया कि 25 अक्तूबर 1936 को भारत माता मंदिर के उद्घाटन समारोह में बापू ने कहा था इस मंदिर में भारत माता से प्रेम करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत होगा और यहां अपनी सामर्थ्य तथा विश्वास के अनुरूप आराधना कर सकेंगे। उन्होंने आगे कहा जिस माता ने हमें जन्म दिया, वह कुछ ही वर्ष जीवित रहेंगी, किंतु धरती माता तो सदैव हैं। यदि वह नहीं हैं तो हम भी नहीं हैं। उद्घाटन समारोह में खान अब्दुल गफार खां, सरदार पटेल, शिवप्रसाद गुप्त, भगवान दास समेत राष्ट्रीय आंदोलन के कई दिग्गज मौजूद थे। देश के विभिन्न प्रांतों से 35 हजार लोग यहां आए थे।
काशी में ही रखी गई श्री गांधी आश्रम की नींव
आचार्य कृपलानी काशी हिंदू विश्वविद्यालय छोड़कर काशी विद्यापीठ में आचार्य बने। उसी यात्रा के बीच उन्होंने गांधी जी से पूछा कि आगे क्या करना है। गांधी ने कहा कि कहीं बैठ जाओ और चरखे का काम संगठित रूप से करो। गांधी जी की प्रेरणा पर आचार्य कृपलानी ने काशी से खादी एवं चरखे के संस्थागत संगठित आंदोलन की शुरूआत करते हुए देश की पहली खादी संस्था श्री गांधी आश्रम की नींव रखी।