खुदाई में मिली दीवार, फर्श को दिखातीं इतिहासविद् प्रो. विदुला जायसवाल।
काशी में गंगा किनारे डेढ़ हजार साल पहले भी कोई नगर या बस्ती रही होगी। पक्का महाल की उम्र का पता लगाने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट सरस्वती पार्क में चल रही खुदाई के दौरान बुधवार सुबह गुप्तकालीन फर्श और करीब डेढ़ मीटर लंबी दीवार मिली। पुरातत्वविद इसे 1500 वर्ष पुराने अतीत से जोड़कर देख रहे हैं।
यहां चल रही खुदाई में मिट्टी के बड़े घड़े के रुप में संग्रह पात्र, पुरानी इमारतों के नक्काशीदार पत्थरों के टुकड़ों के अलावा तीन फर्श और प्राकृतिक दीवारें पहले मिल चुकी हैं। पंद्रह मजदूरों की मदद से खुदाई कराई जा रही है। पहले ही मिल चुका है। खुदाई करा रही प्रख्यात पुरातत्वविद् प्रो. विदुला जायसवाल का कहना है कि अभी जमीन की प्राकृतिक सतह नहीं मिली है इसलिए बारिश न होने तक खुदाई जारी रहेगी।
सरस्वती पार्क में आठ अप्रैल से खुदाई का काम चल रहा है। करीब दस मीटर नीचे तक हुई खुदाई में बुधवार को एक पक्की फर्श मिली। छोटे-छोटे ईटों से बनी दीवार भी प्राप्त हुई है। एक तरफ से डेढ़ मीटर तक नजर आ रही दीवार में ईटों के छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। लाल सुर्खी से दीवार की जुड़ाई की गई है। तिरछी दीवार एक तरफ से भीतर घुसी हुई है। इसका पूरा स्वरूप सामने लाने में अभी समय लगेगा। प्रो. विदुला का कहना है कि वहां मिल रहे अवशेषों के गुप्तकालीन होने का अनुमान है। गुप्तकाल में वहां जरूर कोई बस्ती रही होगी।
खुदाई के काम में डॉ. मीरा शर्मा, डॉ. गार्गी चटर्जी, डॉ. आरती, डॉ. मनोज कुमार आदि शामिल हैं। दोपहर में महापौर रामगोपाल मोहले भी निगम अधिकारियों के साथ खुदाई स्थल देखने पहुंचे।