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बनारस में महामूर्ख मेला, योगी के एंटी रोमियो स्क्वायड का कुछ इस तरह उड़ाया मजाक

Sun, 02 Apr 2017 05:36 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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Maha Murkh Mela - फोटो : अमर उजाला
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मूर्ख पुरोहित ने मोमबत्ती की रोशनी में गड़बड़ मंत्रों से पुरुष की पुरुष से शादी कराई। दूल्हा कृपाशंकर सिंह और दूल्हन हास्य कवि डंडा बनारसी बने। शादी के बाद ही दुल्हन ने दूल्हे की आदतों पर इतराज जताया और तुरत तलाक भी हो गया।
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राजेंद्र प्रसाद घाट पर महामूर्ख मेले में उल्टे-पुल्टे दृश्यों, बेमेल नजारों और मूर्खताओं के जरिए योगी सरकार के एंटी रोमियो अभियान पर विशेष रूप से फोकस किया गया। हास्य-व्यंग की कविताओं पर हंसते-हंसते भीड़ लोटपोट हो गई।

राजेंद्र प्रसाद घाट पर महामूर्ख मेला का इस बार एजेंडा था- सबका साथ सबका विकास। गुरु प्रसाद यादव ने गधे की आवाज में चींपो-चींपो कर मूर्खता का शंखनाद किया। इस बार का संदेश दिया गया कि विवाह पुरुष जीवन की सबसे बड़ी मूर्खता है।
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बनारसी पन के रस में पगे इस सांस्कृतिक मेले में इस बार पुरुष की शादी पुरुष से कराई गई। एंटी रोमियो स्क्वायड की भी झलक पेश की गई। आशय था कि रोमियो-जुलियट को बदनाम किया जा रहा है। रोमियो-जुलियट का प्रेम पवित्र था।
 
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रोमियो -जुलियट का विवाह भी कराया गया

Maha Murkh Mela - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने शादी की थी। लेकिन जो लड़कियों से छेड़खानी कर रहे हैं, उन्हें रोमियो का नाम नहीं दिया जाना चाहिए। इससे प्रेम का पवित्र रिश्ता बदनाम हो रहा है। रोमियो -जुलियट का भी विवाह कराया गया। रोमियो बनी श्रुति और जुलियट प्रमोद जायसवाल।

​अतिथियों को कजरौटा, महिलाओं की चोटियां, झुनझुना देकर सम्मानित किया गया। आयोजक संस्था शनिवार गोष्ठी के अध्यक्ष रहे पं. धर्मशील चतुर्वेदी को यह मेला समर्पित किया गया था। शादी के बाद हास्य के हंसगुल्लों से कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई। सांड़ बनारसी ने जब मंच संभाला तब भीड़ के बीच से सीटियों का शोर बढ़ गया। उनकी कविता की पंक्तियां इस तरह थीं- अब प्रदेश विकसेगा फलेगा स्वरोजगार/ चारो धाम यात्रा को हर कोई जाएगा/ भ्रष्टाचारियों, घूसखोरों कीखैर होगी नहीं/ आम आदमी मजे से बांसुरी बजाएगा/ बहू बेटियों की तो सुरक्षा सर्वोपरि है/कर्म योगी प्रगति के पथ पे ले के जाएगा// बूचड़खाने बंद करदिए हैं अवैध सभी/ खुश हूं कि सांड़ कटने से बच जाएगा...।

इनके अलावा बिहारी लाल अंबर, डंडा बनारसी, रामबाबू सिकरवार, बादशाह प्रेमी, श्यामलाल यादव, अंजनि कुमार शेष, डॉ. अजय शंकर पांडेय, डॉ. अनिल चौबे, राधेश्याम भारती, दिनेश सिंह गुक्कज, बिजेंद्र मिश्र दमदार ने कविताएं पढ़ीं।
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