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काशी में महाकुंभ : DM के साथ एडिशनल CP, ADM सिटी ने संभाली कमान, संतों का हुआ भव्य स्वागत; सुरक्षा दुरुस्त

Mon, 10 Feb 2025 04:59 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी में महाकुंभ जैसा नजारा दिखने लगा है। सड़कों से लेकर घाटों तक साधु-संन्यासियों का जुटान हो रहा है। गंगा किनारे नागा साधु जप-तप में लीन हैं।
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साधु-संन्यासियों का स्वागत करते जिलाधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाकुंभ से काशी पहुंचे सबसे बड़ा जूना अखाड़ा के साधु-संन्यासियों का अफसरों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। डीएम एस. राजलिंगम, एडिशनल सीपी डॉ. एस चनप्पा व एडीएम सिटी आलोक वर्मा ने लोहता के एक स्कूल में उनका स्वागत किया। 

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यहां साधु संतों को भोजन कराया और खुद भी उनके साथ भोजन किया। यहां से संतों का जत्था बैजनत्था पहुंचा। पलक पांवड़े बिछाए लोगों ने पांच किमी तक पुष्पवर्षा की। सड़क के दोनों तरफ खड़े होकर उनको नमन व वंदन किया। संत भी लोगों को आशीर्वाद देते हुए आगे बढ़ रहे थे।

महाकुंभ में करीब डेढ़ माह अमृत स्नान, आराध्य देवों की पूजा करने के बाद उनका काशी प्रवास शुरू हो गया है। दोपहर में वह वाहनों से लोहता के एक स्कूल में पहुंचने लगे। डीएम ने अफसरों के साथ स्वागत किया। महंत प्रेम गिरि महाराज ने अधिकारियों को अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया। 
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संतों के आशीवर्चन व प्रसाद ग्रहण किया। एक घंटे तक वहां ठहरे। इसके बाद जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सभापति महंत प्रेम गिरी महाराज की अगुवाई में वह करीब एक दर्जन वाहनों से जुलूस के रूप में निकले। वाहन पर ही ढोल बजाते हुए चल रहे थे। उनके वाहन के आगे-पीछे पुलिस की गाड़ियां चल रही थीं। 

चांदपुर, मंडुवाडीह, महमूरगंज, रथयात्रा, कमच्छा होते हुए बैजनत्था स्थित तपेश्वर मठ पहुंचे। इस दौरान जगह-जगह राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, आमलोगों ने गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्पवर्षा की। फल, पानी आदि का वितरण भी किया। मठ में पहुंचने पर भी भव्य स्वागत हुआ। उनकी गद्दी लगाई गई।

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महाकुंभ सनातनियों का सबसे बड़ा मेला
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरि महाराज ने जुलूस के पूर्व अपने एक घंटे के प्रवास के दौरान आशीवर्चन में कहा कि भारत में ही साधु-संत मिलेंगे। विदेशों में यहां से ही जाते हैं। जब सिकंदर भारत पर कब्जा करने चला तो अपने गुरू अरस्तु से आशीर्वाद लेने के बाद बोला की भारत से आपके लिए क्या लाऊंगा तो अरस्तु ने ऋषि-मुनियों को मांगा था, ताकि उनसे मैं भी सनातन धर्म की शिक्षा और दीक्षा पा सकें। 
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