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माघ मेला: तीन जोन में बंटे काशी के 84 घाट, सबसे खतरनाक रेड जोन में 13 घाट; श्रद्धालुओं के लिए विशेष निगरानी

Sun, 04 Jan 2026 05:58 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: माघ मेले को लेकर वाराणसी की कमिश्नरेट पुलिस और संबंधित विभाग अलर्ट मोड में हैं। साफ-सफाई के साथ सुरक्षा के सारे इंतजाम कर दिए गए हैं। 84 घाटों को तीन जोन में बांटा गया है।
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गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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Magh Mela 2026: माघ मेले की शुरुआत के साथ ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा अहम हो गई है। इस साल काशी के 84 घाटों को तीन जोन में बांटा गया है। सबसे खतरनाक रेड जोन में काशी के 13 घाट शामिल किए गए हैं। इन घाटों पर अचानक भीड़ बढ़ने और स्नान के दौरान गंगा में डूबने की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। विशेष एहतियात के तौर पर इन घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ के गोताखोरों की तैनाती की गई है।

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माघ मेला और कुंभ पलट प्रवाह को देखते हुए रेड जोन में श्रद्धालुओं का स्नान करना खतरे से खाली नहीं है। रेड जोन में दशाश्वमेध घाट, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट, प्रयाग घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, मान मंदिर घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, ललित घाट, मीर घाट, राजघाट, तुलसी घाट, अस्सी घाट और रानी घाट शामिल हैं। यलो जोन में 14 घाटों को रखा गया है। इनमें जानकी घाट, तेलियानाला घाट, गाय घाट, दुर्गा घाट, पंचगंगा घाट, सिंधिया घाट, प्रहलाद घाट, मुंशी घाट, दरभंगा घाट, चौसट्ठी घाट, मानसरोवर घाट, केदार घाट, हनुमान घाट और गुलरिया घाट शामिल हैं।

सीढ़ियों से गंगा में उतरते ही अचानक बढ़ जाती है 12 से 15 फीट गहराई
3 जनवरी से 15 फरवरी तक 44 दिन चलने वाले माघ मेले में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के समूह काशी में स्नान के लिए पहुंचते हैं। खतरनाक घाटों पर साइनेज की संख्या बेहद कम है, जिससे बाहरी श्रद्धालुओं को यह पता नहीं चल पाता कि कहां स्नान सुरक्षित है। 

कई बार नाविकों के कहने पर श्रद्धालु किसी भी घाट की सीढ़ियों से नीचे उतर जाते हैं। सीढ़ियों से आगे बढ़ते ही अचानक 12 से 15 फीट तक गहराई बढ़ जाती है। गहराई में जाते ही जिन्हें तैरना नहीं आता, वे पानी में समा जाते हैं। इन घाटों पर गुफानुमा मढ़ियां भी हैं, जिनमें गोता लगाने के बाद यदि कोई अंदर चला जाए, तो उसका बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

एक साल में 40 डूबे, 154 को बचाया गया
जल पुलिस प्रभारी राम किशोर पांडेय ने बताया कि पिछले साल काशी के विभिन्न घाटों पर 40 लोगों की डूबने से मौत हुई, जबकि 154 लोगों को बचाया गया। सबसे अधिक लोग तुलसी घाट पर डूबे। डूबने वालों में अधिकतर को तैराकी नहीं आती थी।

घाटों पर नहीं है पिकेट और स्थायी ड्यूटी प्वाइंट
दशाश्वमेध घाट को छोड़ दिया जाए, तो तुलसी घाट से नमो घाट तक कहीं भी जल पुलिस की स्थायी पिकेट और ड्यूटी प्वाइंट नहीं है। हॉटस्पॉट बन चुके इन घाटों पर साइनेज की संख्या भी नगण्य है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस का थाना है और यहीं से तीन पेट्रोलिंग टीमें गंगा में मोटरबोट से गश्त करती हैं।

44 दिन तक उमड़ेगी स्नान करने वालों की भीड़, घाटों पर व्यवस्था नदारद
काशी में अगले 44 दिन तक गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। प्रयागराज के बाद काशी में दर्शन-पूजन और गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का बड़ा समूह पहुंचता है। पलट प्रवाह के रूप में आने वाली भीड़ को संभालने के लिए जिला प्रशासन और कमिश्नरेट पुलिस की ओर से सुरक्षा की मुकम्मल तैयारियों का दावा किया जा रहा है। अस्सी से नमो घाट के बीच कुछ ही घाटों पर चेंजिंग रूम बनाए गए हैं, जबकि अधिकतर घाटों पर मोबाइल टॉयलेट की भी व्यवस्था नहीं है।

इन दिनों होगी स्नान करने वालों की अधिक भीड़
  • 14/15 जनवरी – मकर संक्रांति
  • 18 जनवरी – मौनी अमावस्या
  • 23 जनवरी – बसंत पंचमी
  • 1 फरवरी – माघी पूर्णिमा
  • 15 फरवरी – महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान)
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खतरनाक घाटों पर इन प्रोटोकॉल का नहीं हो रहा पालन
  • गंगा घाटों पर स्नान या पानी में उतरने वालों के लिए पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था नहीं
  • घाट की दीवारों पर लगे चेतावनी बोर्ड स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते
  • पानी में उतरने और गहराई तक जाने वालों को रोकने की व्यवस्था नहीं
  • सभी घाटों पर सतर्कता संबंधी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं
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