Varanasi News: आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार गंगा दशहरा पर चित्रा नक्षत्र और शुभ मुहूर्त बन रहा है। जबकि व मानस, वरीयान, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के दस पापों या दस जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा। इस बार 23 साल बाद पंच महायोग बन रहा है। इस महायोग में हर कोई मां गंगा का दर्शन-पूजन कर अमृत फल की कामना करेगा। श्रद्धालु मां गंगा में पुण्य के लिए गोते लगाएंगे तो 84 घाटों पर पूजन व आरती कर 56 भोग लगेगा।
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वहीं, मां गंगा को करीब 11 सौ मीटर लंबी चुनरी चढ़ाई जाएगी, जो 250 महिलाओं ने भेंट की है। दशाश्वमेध, अस्सी और पंचगंगा घाट पर विशेष पूजन होगा। वहीं, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में संगीत की रसधार बहेगी।
ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष गंगा दशहरा के दिन ही भगवान शंकर की जटा से वृषभ लग्न में मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं। इस दिन पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। गंगा स्नान और पूजन से कोटि पुण्य का फल मिलता है। 16 जून यानी रविवार को काशी में प्रवाहित उत्तरवाहिनी गंगा की पूजा होगी।
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सभी घाटों पर षोडशोपचार पूजन होगा। श्रद्धालु भोर से ही गंगा स्नान और पूजन अर्चन करेंगे। वहीं, संस्थाओं की ओर से पूजन होगा। गंगोत्री सेवा समिति, गंगा सेवा निधि की ओर से शाम को दशाश्वमेध घाट पर वैदिक रीति से पूजन होगा। विराट आरती होगी। 51 रिद्धि-सिद्धि रहेंगी। भजन संध्या का आयोजन होगा।
ब्रह्मराष्ट्र एकम् संस्था की ओर से अस्सी घाट पर आरपार 1100 मीटर चुनरी चढ़ाई जाएगी। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष सचिन मिश्र ने बताया कि सुबह मां का चुनरी चढ़ाई जाएगी जो वाराणसी, प्रयागराज, सोनभद्र के अलावा गुजरात, राजस्थान की कुल 250 महिलाओं ने भेजी है।
शाम को 56 भोग लगेगा और भजन संध्या का आयोजन होगा। पंचगंगा घाट पर मंगला गौरी मंदिर के महंत पं. नारायण गुरु के आचार्यत्व में 10 आम, 10 दीप, 10 तरह की फूल माला से मां गंगा का षोडशोपचार पूजन होगा।