काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (एसवीडीवी) संकाय के नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ फिरोज खान का शुक्रवार को बीएचयू की ओर से बयान जारी किया गया जिसमें उन्होंने उनकी नियुक्ति के संबंध में मीडिया पर अनावश्यक कयासबाजी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि वह आए दिन समाचार पत्रों में ऐसी खबरें पढ़ रहे हैं जो कि सही नहीं हैं। कहा कि न तो उन्हें कहीं जाने की आवश्यकता है और न ही उनके पास शहर छोड़ने का कोई कारण है। कहा कि मैं पढ़ना चाहता हूं और पढ़ाना भी चाहता हूं। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे महामना की बगिया में शिक्षण का अवसर मिला है।
बताते चलें कि शुक्रवार को डॉ फिरोज के संबंध में कई जानकारी सामने आई जिसमें यह महत्वपूर्ण रही कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय के संहिता एवं संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे डॉक्टर फिरोज खान ने बड़े गुपचुप तरीके से इंटरव्यू दिया।
एक कार में बैठकर फिरोज होल्कर हाउस गए और इंटरव्यू के तुरंत बाद वहां से वापस चले गए। दस अभ्यर्थियों की सूची में पहले नंबर पर फिरोज का नाम था और इंटरव्यू में फिरोज समेत कुल आठ अभ्यर्थी शामिल हुए। शाम तक जारी परिणाम भी जारी हो सकता है। उधर आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने पूछे जाने पर बताया कि सुबह 8 बजे फिरोज ने इंटरव्यू दे दिया है। परिणाम शाम तक पता चल सकता है।
नवंबर माह की शुरुआत से ही बीएचयू में डा. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद को थामने की कोशिश भी जारी है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के साहित्य विभाग में प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होने के बाद से ही छात्रों द्वारा मुस्लिम शिक्षक होने की वजह से नियुक्ति के विरोध का सामना करना पड़ा।
पूर्व में भी इस बात की आशंका थी कि उनको बीएचयू के ही किसी दूसरे विभाग में समायोजित या नियुक्ति की जाए। विवाद को टालने के क्रम में उम्मीद यह भी है कि विवि में ही दूसरे विभाग में उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी कर माह भर से चल रहे विवाद को खत्म कर दिया जाए।