इस दौरान राकेश पांडेय ने हाथ में लिए हुए धारदार हथियार से दुबरी पांडेय का सिर और दोनों हाथ के अंगूठे काट दिए। इसके बाद सिर और अंगूठे पोखरी में फेंक दिए। वादी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार और पोखरी से मृतक का सिर और अन्य अंग बरामद किए।
साथ ही विवेचना पूरी कर सभी के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह ने कुल नौ गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से भी पांच गवाहों को पेश कर तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों का अवलोकन करने के बाद आरोपी अधिवक्ता राकेश पांडेय और यशवंत चौबे को हत्या व सबूत मिटाने का दोषी पाया। आरोपी इंद्रासन पांडेय और घनश्याम पांडेय की मौत हो जाने के चलते उनके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी। वहीं आरोपी मिथिलेश उर्फ दीपू पांडेय के नाबालिग होने के चलते उनकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।