माघी पूर्णिमा पर काशी पहुंचे प्रधानमंत्री सुबह सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर में मत्था टेकने और लंगर छकने के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। यहां मेधावियों को उपाधि और पदक से नवाजने के बाद प्रधानमंत्री ने दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। मोदी ने विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय को दिव्यदृष्टा और दूरदर्शी बताते हुए याद किया।
पीएम ने उपाधि पाने वाले युवाओं से कहा कि यह दीक्षांत समारोह है। इसे शिक्षांत समारोह न समझें। यह नई प्रेरणा का अवसर है। आपके अंदर का जिज्ञासु विद्यार्थी कभी मुरझाना नहीं चाहिए।
होनहार विद्यार्थियों से कहा कि सपने बड़े देखिए और दुनिया के लिए कुछ करिए।
पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि देश-दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। उनके बीच आपकी भूमिका क्या हो, इसे तलाशें। कुछ ऐसा करें कि लोग युगों तक याद करें। नए-नए अनुसंधान के बारे में सोचें।
महज डिग्री के लिए पढ़ने का क्या मतलब है। आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल (आनुवांशिक रक्त विकार) जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का सही तरीका अब तक नहीं खोजा जा सका है। क्या ऐसी बीमारियों को जड़ से खत्म करने का कोई उपाय हम खोज सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है। पूरी दुनिया पेरिस में जुटी थी। 2030 तक धरती का तापमान दो डिग्री कम करना है। क्या हम यह चुनौती स्वीकार कर सकते हैं।
हमारे भीतर तमाम तत्व ज्ञान है। हम दुनिया को परिवार और ब्रह्मांड को कुनबा मानते हैं। पूछा कि क्या हम दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए कोई रास्ता निकाल सकते हैं।
पीएम ने युवा शक्ति से कहा कि प्रकृति के साथ संघर्ष नहीं संवाद होना चाहिए। बताया कि अमेरिका, फ्रांस, भारत और बिल गेट्स का स्वयंसेवी संगठन मिलकर इस मसले पर काम कर रहे हैं।
पहली बार दुनिया के 122 देशों का संगठन बना है, भारत जिसका अध्यक्ष है। इससे तो हमारी जिम्मेदारी भी बड़ी है।