उन्होंने बताया कि साढ़े तीन घंटे से ज्यादा हो गए लेकिन उनका नंबर नहीं आया। लकड़ी ठेकेदार हरि ने बताया कि आम दिनों में जहां 40-50 शव आते थे लेकिन अब इसकी संख्या दोगुनी हो चुकी है। नीचे प्लेटफार्म पर 12 और ऊपर के प्लेटफार्म पर 10 शव एक साथ जलाए जा रहे हैं। पांच और छह प्लेटफार्म ऐसे हैं, जिनपर जलाने की अनुमति नहीं है। कुछ प्लेटफार्म की जालियां खराब होने के कारण उन पर शवदाह नहीं हो रहा है।
ईश्वरपुर गांव में मंगलवार सुबह आबादी के बीच निजी जमीन में वृद्धा का शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया। एसडीएम पिंडरा और थाने की पुलिस ने आबादी के बाहर शव दफनाने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कराया। वृद्धा के शव को पुत्र ने अपने बगीचे की जमीन में दफनाया।
स्वास्थ्य विभाग में सीएमएस पद से सेवानिवृत्त गांव के रहने वाले डॉ. जयनरेश गौड़ की मां सुरजकली (85) का सुबह निधन हो गया। रिटायर्ड चिकित्सक आबादी के बीच स्थित निजी जमीन में शव दफनाने के लिए गड्ढा की खोदाई करा रहे थे। इसका ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीएम पिंडरा राजीव राय मौके पर पहुंचे। रिटायर्ड चिकित्सक ने अपनी गौड़ी परंपरा के अनुसार शव को दफनाने का हवाला दिया। वहीं, ग्रामीण अपनी बात पर अडिग हो गए। अंत में चिकित्सक ने अपने निजी जमीन में शव दफनाने पर सहमति दी।