भोजपुरिया धुनों की मिठास गुरुवार की रात टाउनहाल के मैदान में संगीत प्रेमियों को आनंदित कर गई। भोजपुरी लोक गीत गायक आलोक पांडेय ने गीतों से जहां लोगों को झुमाया, वहीं बिरहा गायक मन्नू लाल यादव ने पूर्बी, छपरहिया और अन्य लोक धुनों से मन मोह लिया। कई कलाकारों ने लोकगीतों की प्रस्तुतियों से भोजपुरी संगीत संध्या को यादगार बनाया। सुर गंगा संगीत महोत्सव की यह निशा साहित्यकार पं. धर्मशील चतुर्वेदी को समर्पित थी।
रियलिटी शो सुर संग्राम के उप विजेता आलोक पांडेय ने सबसे पहले देवाधिदेव महादेव को समर्पित डम-डम डमरू बजावे लें हमार जोगिया... सुनाकर भोजपुरी निशा का श्रीगणेश किया। मन्नू लाल यादव की लोक गायकी का हर कोई दीवाना रहा। उन्होंने पहले साहित्यिक बिरहा -गुलजार मधुर रागन में लालिमा... पेश किया। इसके बाद रसना गहन छंद, जिह्वा पकड़ कर गाया जाने वाला बिरहा के बाद अंत में प्रीत क मोहरवा हियरवा में घोर...प्रस्तुत कर लोक संस्कृति की बानगी पेश की।
इनके साथ ढोलक पर महेंद्र कुमार, हारमोनियम पर बृजेंद्र कुमार, झांझ पर चंचल यादव, करताल पर राजेंद्र विश्वकर्मा, रामनरेश तथा सह गायन पर रवि ने संगत की।
भोजपुरी संध्या में स्थानीय कलाकारों ने भी लोकगायन के खूब रंग बिखेरे। अमलेश पांडेय अमन ने- माई आज तोरे अंगना... शिव प्रसाद पाल ने- गुरु के भजनिया ते बाड़े... अरूण सिंह ने फोन से दिल नाहीं भरात... सुमना अग्रहरि ने- बहे लागल पूर्वी बयरिया... की प्रस्तुति की। विकास पांडेय ने- ओढ़नी के रंग पीयर... जितेंद्र यादव ने- दरोगा जी हो..., शशिकांत कौशल ने- काहे दगाबाजी कईलू... जैसे भोजपुरी गीत प्रस्तुत किए।