Varanasi News: कवियों और संगीतकारों की रचनाएं सुनकर दर्शकों ने खूब वाहवाही की, तालियां बजाई। अंत में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न तरह के आयोजन भी हुए। लोकतंत्र की मजबूती को बनाए रखने के लिए मतदान प्रतिशत बढ़ाने की अपील की।
लोकतंत्र के महापर्व में सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को काशी के कवियों की जुटान हुई। मैदागिन स्थित पराड़कर स्मृति भवन में आयोजित लोकमत परिष्कार कवि गोष्ठी में कवियों ने काव्य पाठ कर जन-जन को मतदान के लिए प्रेरित किया। सबसे पहले कार्यक्रम संयोजक पंडित देवब्रत मिश्र ने देश के तुम भाग्य विधाता, अब अपना मतदान करो, राष्ट्रहित में ए मनुज अपना तुम मतदान करो... से गोष्ठी का शुभारंभ किया।
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शृंखला को आगे बढ़ाते हुए डॉ. नसीमा निशा ने किसको दूं मैं वोट यहां पर सबके दिलों में खोट यहां पर, वोट आपका हक है वोट दीजिए साहब मत कहें किसी से ये नोट दीजिए साहब... सुनाया। नवगीतकार सुरेंद्र वाजपेयी ने पानी जब गुनगुना हुआ बुल्ले कुछ गुनगुना उठे, रिश्ता जब झुनझुना हुआ रस्ते सब झनझना उठे... सुनाया।
ब्रजेश चंद्र पाण्डेय ने बाबा विश्वनाथ क नगरी बन गइल राजा क्योटो, एक सवारी बाइस टोटो... सुनाया। धर्मेंद्र गुप्ता साहिल ने रूप रंग रसगंध है काशी, जीवन का अनुबंध है काशी... सुनाया। वहीं, नरोत्तम शिल्पी ने चक्कर लगा के आया सूरज भी कह रहा है, सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा... सुनाया।
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अध्यक्षता करते हुए कवियत्री प्रियंका अग्निहोत्री ने भूगोल बदल देता है इतिहास बना देता है, आम सी बातों को भी वो खास बना देता है... सुनाकर खूब तालियां बटोरी। इनके अलावा राजेंद्र गुप्ता, शुभजीत साहा, प्रज्ञा मिश्रा आदि ने भी काव्यपाठ किया। मुख्य अतिथि पंडित शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि काशी विश्व का नेतृत्व करने वाली नगरी है। जब यहां पिछ्ले बार से अधिक मतदान होगा तभी काशी का मान बढ़ेगा।
विशिष्ट अतिथि डॉ. शुकदेव त्रिपाठी रहे। अध्यक्षता डॉ. अत्रि भारद्वाज ने की। संयोजन देवब्रत मिश्रा और संचालन साहित्यकार अशोक सिंह ने किया। इस मौके पर सुरेश प्रसाद पांडेय, प्रताप बहादुर सिंह, देवयानी मिश्रा, कृष्णा मिश्रा आदि उपस्थित रहे।