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# Lock down: मैं फंस गया हूं, मुझे कोरोना की जांच करानी है.... सारी शिकायतों के लिए बस एक ही सहारा

Thu, 02 Apr 2020 12:00 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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facebook twitter - फोटो : social media
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कोरोनो वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए घोषित लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया आमजन की मदद से लेकर समस्याओं के समाधान में भी अहम भूमिका निभा रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अमले से लेकर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर खासे सक्रिय हैं। मुसीबत में फंसे लोगों के ट्वीट, पोस्ट या मैसेज के आधार पर सभी जरूरतमंदों की मदद के लिए अपने-अपने स्तर पर तत्काल सक्रिय हो जाते हैं।

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कई लोगों का तो यह भी कहना है कि यदि सोशल मीडिया न होता तो शायद लोगों की मदद करने में खासी दिक्कतें आती और कौन जरूरतमंद है, इसका पता लगाने में खासी दिक्कत होती। इसके साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स यह भी अपील कर रहे हैं कि सोशल मीडिया का उपयोग अफवाह फैलाने के लिए या गलत जानकारी देने के लिए नहीं बल्कि मुसीबत में फंसे लोगों की मदद के लिए ही किया जाए।सोशल मीडिया पर सूचना पाकर भोजन पहुंचाते हैं शिकायत भी सुनते हैं।
 

ट्वीटर पर एक युवती ने अपने दोस्त के ट्वीट को री-ट्वीट कर बुधवार को कहा कि लॉकडाउन में दक्षिण भारतीय परिवार काशी में फंसा हुआ है। इसके साथ ही वाराणसी पुलिस से मदद मांगी। वाराणसी पुलिस ने ट्वीट चेक करा कर थोड़ी देर बाद जवाब दिया कि उन्हें चेतगंज थाने की पुलिस नियमित भोजन करा रही है। 

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इसी तरह से दिल्ली से राजातालाब आए तीन लोगों की सूचना देकर ट्वीटर यूजर्स ने उनकी जांच कराने की मांग बुधवार को की। इस पर पुलिस की ओर से उन्हें तत्काल यह बताया गया कि कहां और किसे सूचना दें। कोटे पर सही से राशन न मिलना और भूखे रहने जैसी शिकायतें रोजाना इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस तक आ रही हैं। शिकायतों को देखकर तत्काल शिकायत के समाधान के साथ ही लोगों को भोजन पुलिस की ओर से पहुंचाया जा रहा है।

 

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ट्विटर - फोटो : अमर उजाला

व्हाट्सएप और फेसबुक पर नंबर देकर भूखों की मांग रहे जानकारी

लॉकडाउन के दौरान शहर के अन्य सामाजिक संगठनों की तरह रोजाना सिंधी समाज के लोग भी जरूरतमंदों को भोजन के पैकेट दे रहे हैं। इसके साथ ही सिंधी समाज के पूर्व पार्षद शंकर विशनानी सहित अन्य लोग व्हाट्सएप और फेसबुक पर अपना नंबर शेयर कर अपील कर रहे हैं कि कोई भूखा हो तो हमें बताएं, हम उसे तत्काल खाना पहुंचाएंगे।

इसी तरह से अमन कबीर और ऋषि राज पांडेय जैसे युवा सामाजिक कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर उनकी हर तरह की मदद करते हैं। इसके साथ ही अपना मोबाइल नंबर भी जरूरतमंदों को देने के लिए सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं।

जरूरी निर्देश बताने में होती है आसानी, निगरानी में भी सहूलियत

एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से लॉकडाउन की इस अवधि में आमजन को जरूरी बातें या सरकार के निर्देशों के बारे में बताने में आसानी होती है। इसके लिए पुलिस ट्वीटर, व्हाट्सएप और फेसबुक तीनों का सहारा लेती है। हम लोगों को संदेश रहते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

यदि कोई अफवाह फैलती है तो उसका खंडन करने में भी सोशल मीडिया से अच्छी मदद मिलती है। इसके अलावा थाना स्तर के डिजिटल वालंटियर्स की मदद से आसानी से आमजन की गतिविधियों की निगरानी भी पुलिस करती है। जिला पुलिस का जो गोपनीय व्हाट्सएप नंबर 7897532425 है, उस पर आने वाली सूचनाओं की पुष्टि करा कर गलत काम करने वालों की धरपकड़ भी की जाती है। एसएसपी ने कहा कि सोशल मीडिया हर तरह से लाभकारी है, बस इसका इस्तेमाल सिर्फ रचनात्मक काम के लिए ही हो।

मुसीबत में फंसे हों तो मांगे पुलिस से मदद

यदि आप कहीं मुसीबत में फंसे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। 112 नंबर पर कॉल करके या फिर ट्वीटर और फेसबुक पर वाराणसी पुलिस से संपर्क कर मदद मांगी जा सकती है।
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